सूचना का अधिकार केवल एक कानून नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूत नींव है उसका अक्षरशः पालन जरूरी
जयपुर:आरटीआई अधिनियम की कमजोर होती प्रभावशीलता
सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम देश में पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक सशक्तिकरण सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है लेकिन वर्तमान स्थिति यह दर्शाती है कि कई सरकारी अधिकारियों में इस कानून के प्रति भय या जवाबदेही की भावना कम होती जा रही है।

विभिन्न विभागों में समय पर सूचना न देना, अधूरी जानकारी देना या जानबूझकर सूचना से इंकार करना आम बात होती जा रही है।
कई मामलों में अधिकारी निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं करते, जिससे आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से अपीलों और शिकायतों के लंबे प्रक्रियात्मक चक्र में उलझना पड़ता है।
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हालांकि सूचना आयोग द्वारा कई बार दंडात्मक कार्यवाही के आदेश दिए जाते हैं, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन की कमी के कारण इन आदेशों का डर समाप्त हो रहा है।
इससे आरटीआई कानून की मूल भावना कमजोर पड़ रही है
मुख्य चिंताएं: दोषी अधिकारियों के खिलाफ दंड का प्रभावी और सख्त क्रियान्वयन न होना
जानबूझकर सूचना छिपाना या गलत जानकारी देना
अपील और शिकायतों का बढ़ता लंबित भार
बार-बार उल्लंघन के बावजूद जवाबदेही का अभाव
इस स्थिति में सुधार के लिए आवश्यक है कि सूचना आयोग सख्ती से अपने आदेशों को लागू करे और दोषी अधिकारियों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करे।
साथ ही, विभागीय स्तर पर भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए और उच्च अधिकारियों द्वारा नियमित निगरानी की जानी चाहिए।

सूचना का अधिकार केवल एक कानून नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूत नींव है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ, तो यह केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा। पारदर्शिता को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाना अब अत्यंत आवश्यक है।
सूचना का अधिकार केवल एक कानून नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूत नींव है उसका अक्षरशः पालन जरूरी



