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श्रीडूंगरगढ़ हाईवे पर भीषण हादसा: स्लीपर बस और चारे से भरे ट्रेलर की टक्कर के बाद लगी आग, आपातकालीन द्वार ने बचाई दर्जनों यात्रियों की जान

राजस्थान के बीकानेर जिले में स्थित श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के नेशनल हाईवे पर बुधवार तड़के एक बड़ा सड़क हादसा हो गया। जयपुर से बीकानेर जा रही एक स्लीपर बस और चारे से भरे ट्रेलर के बीच जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भयानक थी कि दोनों वाहनों में मौके पर ही आग लग गई। बस में सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन बस में बने आपातकालीन द्वार (Emergency Exit) की वजह से बड़ी संख्या में यात्रियों की जान बच गई।
यह हादसा सुबह करीब 5:15 बजे हुआ और हादसे के बाद हाईवे पर लगभग दो घंटे तक यातायात बाधित रहा। फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।

कैसे हुआ हादसा?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जयपुर से बीकानेर जा रही एक निजी स्लीपर बस श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में नेशनल हाईवे से गुजर रही थी। उसी समय आगे चल रहे एक ट्रेलर ने अचानक ब्रेक लगाए क्योंकि उसके सामने चल रहा एक ट्रक रुक गया था। इसी दौरान पीछे से आ रही बस सीधे ट्रेलर से टकरा गई।
टक्कर के तुरंत बाद ट्रेलर में भरे सूखे चारे ने आग पकड़ ली और देखते ही देखते आग ने बस को भी अपनी चपेट में ले लिया। कुछ ही मिनटों में बस धुएँ और लपटों से घिर गई।

🔥 टक्कर के बाद बस में लगी भीषण आग

हादसे के बाद बस के अंदर धुआँ भरने लगा और यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। कई यात्री गहरी नींद में थे क्योंकि यह स्लीपर बस थी। अचानक धुएँ और आग की लपटों से लोग घबरा गए।
हेडकॉन्स्टेबल बलवीर काजला ने बताया कि आग इतनी तेजी से फैली कि बस के मुख्य दरवाजे तक पहुँचना मुश्किल हो गया था। बस का अगला हिस्सा ट्रेलर से टकराने के कारण क्षतिग्रस्त हो चुका था।

🚪 आपातकालीन द्वार बना जीवनदाता

इस हादसे में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका बस में बने आपातकालीन द्वार ने निभाई। पीछे की ओर बने इमरजेंसी गेट को किसी यात्री ने खोल दिया और यात्रियों को एक-एक करके बाहर निकाला गया।
यदि यह आपातकालीन द्वार नहीं होता, तो स्थिति बेहद भयावह हो सकती थी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, दर्जनों यात्रियों की जान इसी आपातकालीन निकास के कारण बच पाई।
हाल के वर्षों में देश में कई बस हादसों में यात्रियों के जिंदा जलने की घटनाएँ सामने आई थीं। इसी कारण प्रशासन ने स्लीपर बसों में आपातकालीन द्वार अनिवार्य किया था। यह नियम इस हादसे में कारगर साबित हुआ।

दमकल की टीम ने पाया आग पर काबू

हादसे की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और एंबुलेंस मौके पर पहुंची। आग इतनी भीषण थी कि बुझाने में काफी समय लगा। ट्रेलर में भरा सूखा चारा लगातार आग को भड़का रहा था।
करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक बस पूरी तरह जल चुकी थी। यात्रियों का सामान भी आग की भेंट चढ़ गया।

हाईवे पर लगा लंबा जाम
हादसे के बाद श्रीडूंगरगढ़ हाईवे पर यातायात पूरी तरह रुक गया। पुलिस ने दोनों ओर से वाहनों को रोका और वैकल्पिक मार्ग से डायवर्ट किया। लगभग दो घंटे बाद यातायात सामान्य हो सका।
सुबह के समय ट्रकों और निजी वाहनों की आवाजाही ज्यादा रहती है, इसलिए जाम की स्थिति बनी रही।
🤕 बस चालक घायल, बीकानेर रेफर
हादसे में बस चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद बीकानेर रेफर कर दिया गया। यात्रियों को मामूली चोटें आईं, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
गौरतलब है कि हाल ही में बेंगलुरु और राजस्थान के बाड़मेर जिले में बसों में आग लगने से यात्रियों की जिंदा जलने की घटनाएँ सामने आई थीं। उन घटनाओं के बाद सरकार और परिवहन विभाग ने बसों में आपातकालीन निकास अनिवार्य करने के निर्देश दिए थे।
श्रीडूंगरगढ़ हादसा इस नियम की उपयोगिता का बड़ा उदाहरण बन गया है।

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