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फायर NOC व वैध अनुमति बिना चल रहे शिव प्लाज़ा-शिव मार्केट पर कार्रवाई की मांग तेज

फायर NOC व वैध अनुमति बिना चल रहे शिव प्लाज़ा-शिव मार्केट पर कार्रवाई की मांग तेज

फायर NOC व वैध अनुमति बिना चल रहे शिव प्लाज़ा-शिव मार्केट पर कार्रवाई की मांग तेज

फायर एनओसी नहीं, निगम रिकॉर्ड नहीं, पॉल्यूशन अनुमति नहीं — शिव प्लाज़ा और शिव मार्केट में हजारों जिंदगियों से खिलवाड़; तुरंत बंदी और डिस्पोज़ल की उठी मांग

मोहम्मद रफीक पठान, अधिवक्ता एवं सोशल एक्टिविस्ट, बीकानेर ने बताया 

बीकानेर शहर के व्यस्ततम क्षेत्र में संचालित शिव प्लाज़ा और शिव मार्केट अब केवल अवैध निर्माण या कागजी अनियमितता का मामला नहीं रह गए हैं, बल्कि यह सीधे तौर पर मानव जीवन, मानव अंगों और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर और चिंताजनक विषय बन चुके हैं।

विभिन्न विभागों से प्राप्त सूचनाएं, लिखित जवाब, सूचना आयोग के आदेश और अधिकारियों की स्वीकारोक्तियां इस तथ्य को निर्विवाद रूप से स्थापित करती हैं कि दोनों मार्केट बिना वैधानिक अनुमति, बिना अनिवार्य सुरक्षा मानकों और बिना अधिकृत रिकॉर्ड के संचालित हो रहे हैं।

सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि नगर निगम बीकानेर ने स्वयं लिखित रूप में स्वीकार किया है कि उनके रिकॉर्ड में शिव प्लाज़ा और शिव मार्केट से संबंधित कोई वैध निर्माण पत्रावली उपलब्ध नहीं है।

फायर NOC व वैध अनुमति बिना चल रहे शिव प्लाज़ा-शिव मार्केट पर कार्रवाई की मांग तेज

इसका सीधा अर्थ है कि करोड़ों रुपये के लेन-देन और सैकड़ों दुकानों के संचालन वाला यह व्यावसायिक ढांचा बिना विधिसम्मत स्वीकृति के खड़ा किया गया और वर्षों से संचालित है। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि शहरी नियोजन नियमों, भवन उपविधियों और कानून व्यवस्था की खुली अवमानना है।

इसी प्रकार, राजस्थान पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के पास भी इन दोनों मार्केटों से संबंधित कोई पर्यावरणीय स्वीकृति या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। जब हजारों लोगों की प्रतिदिन आवाजाही होती हो, कचरा उत्पन्न होता हो, सीवरेज और वेंटिलेशन की व्यवस्था जरूरी हो — ऐसे में पर्यावरणीय अनुमति का अभाव सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।

यह प्रश्न उठता है कि बिना पर्यावरणीय परीक्षण और मानकों के अनुपालन के इतने बड़े व्यावसायिक परिसरों को कैसे संचालित होने दिया गया?

फायर सेफ्टी के मामले में स्थिति और भी भयावह है। दायर परिवाद के जवाब में फायर अधिकारी ने स्पष्ट रूप से लिखकर दिया है कि शिव प्लाज़ा और शिव मार्केट को कोई फायर एनओसी जारी नहीं की गई।

तीन मंज़िला इमारतों में लगभग पौने दो सौ दुकानों का संचालन, संकरी गलियां, आपातकालीन निकास का अभाव, अग्निशमन उपकरणों की अनुपस्थिति — यह सब किसी भी क्षण बड़े हादसे को जन्म दे सकता है। इतिहास गवाह है कि आग की घटनाओं में सबसे अधिक जनहानि अव्यवस्थित व्यावसायिक परिसरों में होती है।

पानी विभाग के संदर्भ में सूचना आयोग की सुनवाई ने विभागीय लापरवाही को उजागर किया। तीन बार नोटिस के बावजूद अधिकारी उपस्थित नहीं हुए और न ही सूचना उपलब्ध कराई। आयोग ने 15 दिवस के भीतर सूचना देने के आदेश जारी किए।

जानकारी के अनुसार दोनों मार्केटों पर लाखों रुपये का पानी बकाया है, लेकिन वसूली या कनेक्शन विच्छेदन जैसी कार्रवाई नहीं की गई। यह स्थिति केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित संरक्षण और भ्रष्टाचार की ओर भी संकेत करती है।

बिजली विभाग की स्थिति भी कम गंभीर नहीं है। शिव प्लाज़ा के संबंध में विभाग ने लिखकर दिया कि उनके पास वैध पत्रावली उपलब्ध नहीं है। शिव मार्केट के मामले में सूचना देने से बचने के लिए तृतीय पक्ष का हवाला दिया गया, जबकि सूचना आयोग ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक हित से जुड़ी सूचना को रोका नहीं जा सकता और 15 दिन के भीतर उपलब्ध कराया जाए।

यह स्पष्ट करता है कि विभागीय पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है।

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इन सभी तथ्यों को एक साथ देखा जाए तो निष्कर्ष एकदम स्पष्ट है

दोनों मार्केटों के पास फायर एनओसी नहीं,

नगर निगम की वैध निर्माण स्वीकृति नहीं,

पॉल्यूशन बोर्ड की अनुमति नहीं,

बिजली-पानी के वैध और पारदर्शी रिकॉर्ड नहीं।

इसके बावजूद दोनों मार्केटों में प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही जारी है। पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं, वॉशरूम जैसी मूलभूत सुविधा तक का अभाव, संकरी गलियां, भीड़भाड़ और सुरक्षा मानकों की अनदेखी — यह सब मिलकर ऐसी स्थिति पैदा करते हैं जहां भगदड़, आग या संरचनात्मक दुर्घटना की आशंका को नकारा नहीं जा सकता।

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि इन दोनों परिसरों में प्रतिदिन आने वाले नागरिकों की जान और सुरक्षा दांव पर लगी हुई है। यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि मानव जीवन के साथ जोखिमपूर्ण प्रयोग है।

जब कानून स्पष्ट रूप से कहता है कि बिना फायर एनओसी, बिना निर्माण स्वीकृति और बिना पर्यावरणीय अनुमति के व्यावसायिक परिसर संचालित नहीं हो सकते, तो फिर इन दोनों मार्केटों को किस आधार पर संचालन की छूट मिली हुई है?

राजस्थान नगर पालिका अधिनियम, भवन उपविधियां, अग्नि सुरक्षा नियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और विद्युत अधिनियम — सभी के संभावित उल्लंघन का मामला सामने है।

इन कानूनों के अंतर्गत प्रशासन के पास ऐसे परिसरों को सील करने, संचालन रोकने और आवश्यक दंडात्मक कार्रवाई करने का स्पष्ट अधिकार और दायित्व दोनों है।

इन्हीं तथ्यों के आधार पर अब शहर में यह मांग तेज हो रही है कि शिव प्लाज़ा और शिव मार्केट को तत्काल प्रभाव से बंद कर डिस्पोज़ल की कार्रवाई की जाए, जब तक कि सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां और सुरक्षा मानक पूर्ण रूप से सिद्ध न हो जाएं। यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता तो जनहित में उच्च न्यायालय की शरण लेने और जनहित याचिका दायर करने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।

आज बीकानेर की जनता का सवाल सीधा और स्पष्ट है —

क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

यदि कल कोई दुर्घटना होती है तो उसकी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी कौन लेगा?

फायर NOC व वैध अनुमति बिना चल रहे शिव प्लाज़ा-शिव मार्केट पर कार्रवाई की मांग तेज

शिव प्लाज़ा और शिव मार्केट अब केवल दो व्यावसायिक इमारतें नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्क्रियता और सार्वजनिक सुरक्षा की अनदेखी का प्रतीक बन चुके हैं।

बीकानेर की सुरक्षा, कानून की प्रतिष्ठा और नागरिकों के जीवन की रक्षा के लिए आवश्यक है कि बिना किसी विलंब के इन दोनों परिसरों पर ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जाए।

समय रहते कदम उठाना ही बुद्धिमत्ता है — क्योंकि हादसे के बाद की कार्रवाई केवल औपचारिकता रह जाती है।

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