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राजस्थान में 24 लाख वोटरों के नाम कटने की आशंका: SIR सर्वे में पुरानी लिस्ट से नहीं हुई मैपिंग, जानें पूरी प्रक्रिया

राजस्थान में 24 लाख वोटरों के नाम कटने की आशंका: SIR सर्वे में पुरानी लिस्ट से नहीं हुई मैपिंग, जानें पूरी प्रक्रिया

राजस्थान में 24 लाख वोटरों के नाम कटने की आशंका: SIR सर्वे में पुरानी लिस्ट से नहीं हुई मैपिंग, जानें पूरी प्रक्रिया

राजस्थान में चल रहे मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) 2024 अभियान के दौरान एक बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य के 24 लाख से अधिक मतदाताओं के नामों की पुरानी वोटर सूची से मैपिंग नहीं हो पाई, जिसके कारण उनके नाम आगामी मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं। यह प्रक्रिया चुनाव आयोग द्वारा जारी उस नए दिशानिर्देश का हिस्सा है, जिसके तहत हर वर्तमान मतदाता का नाम 2002 की वोटर लिस्ट से मिलाया जा रहा है।

चुनाव आयोग ने यह बड़े पैमाने का अभियान 4 नवंबर 2024 से देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू किया था। राजस्थान में भी इस सर्वेक्षण को तेज़ी से पूरा किया गया है, जिसमें करोड़ों लोगों के डाटा को डिजिटलीकृत कर ECINet पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है।

SIR सर्वे के तहत क्यों हो रही है वोटरों की दोबारा जांच?

राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवीन महाजन के अनुसार, डिजिटलीकरण के बाद चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि—

  • प्रत्येक मौजूदा मतदाता

  • या उसके माता-पिता/परिजनों का नाम

  • किसी न किसी रूप में 2002 की वोटर लिस्ट में मिल जाए।

यह मिलान इसलिए जरूरी किया जा रहा है ताकि फर्जी मतदाताओं की पहचान की जा सके और वोटर लिस्ट को बिल्कुल शुद्ध बनाया जा सके। आयोग का कहना है कि पिछले 20–22 वर्षों में कई बार डुप्लीकेट नाम, गैर-मौजूद पते, और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम लिस्ट में चलते आ रहे थे।

अब SIR प्रक्रिया में इन्हें सही किया जाएगा।

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9 दिसंबर को जारी होगा ड्राफ्ट रोल, उसके बाद नोटिस

SIR सर्वे के बाद इसकी पहली बड़ी अपडेट 4 दिसंबर 2024 को आएगी, जब पहला ड्राफ्ट रोल प्रकाशित किया जाएगा।
इसके बाद:

  • 9 दिसंबर को उन मतदाताओं को नोटिस जारी किया जाएगा

  • जिनका नाम 2002 की लिस्ट से मेल नहीं खा पाया

  • या जिनके परिवार का कोई सदस्य पुरानी सूची में दर्ज नहीं है

इन लोगों को अपने दस्तावेज़ पेश करके यह साबित करना होगा कि वे पात्र मतदाता हैं और उनका नाम कटना नहीं चाहिए।

राजस्थान में 24 लाख वोटरों के नाम कटने की आशंका: SIR सर्वे में पुरानी लिस्ट से नहीं हुई मैपिंग, जानें पूरी प्रक्रिया


7 फरवरी 2026 को आएगी अंतिम मतदाता सूची

ड्राफ्ट के बाद दावों और आपत्तियों के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा।
पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद:

7 फरवरी 2026 को राजस्थान की अंतिम मतदाता सूची जारी होगी।

यह तारीख पूरे देश के लिए समान रखी गई है।

राजस्थान में 24 लाख वोटरों के नाम कटने की आशंका: SIR सर्वे में पुरानी लिस्ट से नहीं हुई मैपिंग, जानें पूरी प्रक्रिया

SIR सर्वे में अब तक क्या मिला?

राजस्थान में कुल 5.46 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं।
सर्वे के दौरान राज्य के प्रत्येक मतदाता के घर तक गणना प्रपत्र पहुंचाया गया, जिसे BLO ने भरवाकर वापस लिया।

ECI के अनुसार:

  • अब तक 4.59 करोड़ गणना प्रपत्र एकत्रित हो चुके हैं

  • इन सभी का डिजिटलीकरण पूरा कर ECINet पर अपलोड कर दिया गया

  • अपलोड किए गए कुल मतदाताओं में से 4 करोड़ 34 लाख 77 हजार 808 लोगों के नाम 2002 की पुरानी लिस्ट से मिल गई

इसका मतलब—

इन 4.34 करोड़ लोगों को किसी अतिरिक्त दस्तावेज़ की जरूरत नहीं पड़ेगी।

लेकिन…

24 लाख से अधिक मतदाताओं की मैपिंग पुरानी लिस्ट से नहीं हो पाई है।
➡ इनके नाम हटने का खतरा सबसे ज्यादा है।

कौन-कौन से जिले सबसे ज्यादा प्रभावित?

वो जिले जहां 1 लाख से ज्यादा मतदाताओं की मैपिंग नहीं हुई:

जिलाबिना मैपिंग वाले वोटर
जयपुर1,95,489
जोधपुर1,47,016
भीलवाड़ा1,29,574
सीकर1,15,713
बीकानेर1,11,744
उदयपुर1,03,286

इन जिलों में सबसे ज्यादा संभावित नाम कटने के मामले दर्ज हुए हैं।

राजस्थान में 24 लाख वोटरों के नाम कटने की आशंका: SIR सर्वे में पुरानी लिस्ट से नहीं हुई मैपिंग, जानें पूरी प्रक्रिया


कैसे पता चलेगा कि आपका नाम कटने की लिस्ट में है?

SIR सर्वे के तहत—

  • 9 दिसंबर के बाद

  • हर उस मतदाता को नोटिस भेजा जाएगा

  • जिसकी मैपिंग 2002 की लिस्ट से नहीं हुई

इसके अलावा, आप:

कैसे पता चलेगा कि आपका नाम कटने की लिस्ट में है?

SIR सर्वे के तहत—

  • 9 दिसंबर के बाद

  • हर उस मतदाता को नोटिस भेजा जाएगा

  • जिसकी मैपिंग 2002 की लिस्ट से नहीं हुई

इसके अलावा, आप:

✔ अपने BLO से
✔ ERO ऑफिस से
✔ CEO राजस्थान की वेबसाइट से
✔ या वोटर हेल्पलाइन ऐप से
स्टेटस चेक कर सकते हैं।

पुरानी लिस्ट में नाम नहीं मिला तो क्या करना होगा? (सबसे महत्वपूर्ण भाग)

अगर किसी मतदाता या उसके माता-पिता का नाम 2002 की लिस्ट में नहीं है, तो उन्हें अपनी पात्रता साबित करने के लिए दस्तावेज जमा करवाने होंगे। इनमें शामिल हैं:

साबित करने वाले दस्तावेज (कोई 1 या अधिक):

  • आधार कार्ड

  • राशन कार्ड

  • निवास प्रमाण

  • जन्म प्रमाण

  • स्कूल प्रमाण पत्र

  • बिजली/पानी के बिल

  • घर का रेंट एग्रीमेंट

  • परिवार में किसी सदस्य का 2002 के बाद आया इलेक्टोरल नंबर

इन दस्तावेज़ों की मदद से यह सिद्ध करना होगा कि मतदाता वास्तव में उसी क्षेत्र में निवास कर रहा है और उसका नाम सही कारणों से सूची में होना चाहिए।

क्यों हो रही है इतनी बड़ी गड़बड़ी?

राजस्थान में 24 लाख से ज्यादा नाम का पुरानी सूची से न मिलना कई बड़े मुद्दों की ओर इशारा करता है:

  1. 2002 की सूची डिजिटल नहीं थी → कई नाम गलत या अधूरे थे

  2. कई परिवारों ने पिछले 22 वर्षों में निवास स्थान बदला

  3. कई बूथ क्षेत्रों के सीमांकन बदले

  4. मिलान प्रक्रिया सख्त की गई है

  5. नए मतदाताओं की संख्या लाखों में बढ़ी है

  6. पुरानी सूची में युवा मतदाताओं के माता-पिता का नाम भी कई जगह दर्ज नहीं था

विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत की अब तक की सबसे बड़ी वोटर लिस्ट शुद्धिकरण प्रक्रिया है

राज्य में राजनीतिक हलचल तेज़—क्योंकि हर वोट मायने रखता है

राजस्थान की राजनीति में जिस तरह से हर चुनाव कड़े मुकाबले से तय होता है, ऐसे में 24 लाख संभावित वोटों का हटना राजनीतिक दलों के लिए भी बड़ा झटका है।

कई दलों ने BLO प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, वहीं चुनाव आयोग का कहना है—

“जो वास्तव में पात्र मतदाता हैं, उनके नाम 100% सुरक्षित रहेंगे।”

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