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प्रदेश के 1 लाख शिक्षकों को पास करनी पड़ेगी ‘TET परीक्षा’, शिक्षकों में बढ़ी बेचैनी; जानें क्यों

प्रदेश के 1 लाख शिक्षकों को पास करनी पड़ेगी ‘TET परीक्षा’, शिक्षकों में बढ़ी बेचैनी; जानें क्यों

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में पिछले कई सालों से पढ़ा रहे शिक्षकों को अध्यापक पात्रता परीक्षा (टेट) देनी पड़ सकती हैराजस्थान के सरकारी स्कूलों में पिछले कई सालों से पढ़ा रहे शिक्षकों को अध्यापक पात्रता परीक्षा (टेट) देनी पड़ सकती है। ऐसे शिक्षकों की संख्या करीब एक लाख है। सुप्रीम कोर्ट के इसी माह आए एक फैसले से ऐसे शिक्षकों में बेचैनी बढ़ गई है। शिक्षकों को अपनी नौकरी सलामत रखने के लिए बच्चों को पढाने के साथ खुद को भी पढाई करनी पड़ेगी। शिक्षक अब इसके लिए बैठकें कर इसके समाधान की राह निकालने में लगे हैं।

क्या है मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने इसी माह सितम्बर में सिविल अपील में एक निर्णय दिया है। इस निर्णय के अनुसार सेवारत शिक्षकों की नियुक्ति तिथि चाहे जो भी हो शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य कर दिया गया है। इस निर्णय से राज्य के एक लाख से अधिक शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और आजीविका संकट में है।

यह निर्णय किस पर लागू होगा

सैकंड ग्रेड व व्याख्याताओं के लिए यह नियम लागू नहीं होगा। यह केवल तृतीय श्रेणी शिक्षकों के लिए लागू होगा। शिक्षक नेताओं ने बताया, राजस्थान में वर्ष 2012 व उसके बाद तृतीय श्रेणी शिक्षकों की नियुक्ति टेट व रीट के माध्यम से हुई थी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश वर्ष 2012 व उसके बाद नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए लागू नहीं होगा, क्योंकि उन्होंने तो पहले ही यह पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण कर रखी है। यह निर्णय उन पर लागू होगा जो वर्ष 2012 या इससे पहले तृतीय श्रेणी पद पर नियुक्ति हैं।

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पहले टेट, अब रीट

सबसे पहले इसका नाम अध्यापक पात्रता परीक्षा (टेट) रखा गया। बाद में इसका नाम बदलकर राजस्थान अध्यापक पात्रता परीक्षा (रीट) कर दिया गया। दोनों में ज्यादा अंतर नहीं है। जब सबसे पहले टेट लागू किया था तब राजस्थान के अनेक जिलों में भारतीय जनता पार्टी सहित अनेक संगठनों ने इसका विरोध किया था। झुंझुनूं में तो भाजपा नेताओं ने कई दिनों तक कलक्ट्रेट पर आमरण अनशन किया था।इनका कहना है…

हमारी राजस्थान व केन्द्र सरकार से मांग है कि एक सितम्बर 2025 के उच्चतम न्यायालय के निर्णय पर रिव्यू पिटिशन लगाया जाए। इससे प्रदेश के लाखों शिक्षकों को राहत मिल सकेगी। अभी राजस्थान के करीब एक लाख शिक्षक असमंजस व परेशानी में है। सरकार को एक्सपर्ट से राय लेकर इसका समाधान करना चाहिए। हमारे संगठन ने पिछले दिनों ज्ञापन भी दिया था।

जितेन्द्र गौड़, शिक्षक नेता, शिक्षक संघ राष्ट्रीय

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