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नहीं रहे प्रसिद्ध भपंग वादक जुम्मा जोगी, राजस्थान के लोक संगीत को दिया नया आयाम

नहीं रहे प्रसिद्ध भपंग वादक जुम्मा जोगी, राजस्थान के लोक संगीत को दिया नया आयाम

नहीं रहे प्रसिद्ध भपंग वादक जुम्मा जोगी, राजस्थान के लोक संगीत को दिया नया आयाम

जुम्मा जोगी ने राजस्थान के लोक संगीत को एक नया अंदाज़ दिया। जुम्मा के गीत कभी मेवात में बालिका शिक्षा की जोत जगाते तो कभी जयपुर में सड़क सुरक्षा की अलख। कभी राजनीतिक रैलियों में लोगों बाज़ार या घरों से खींचकर मंच तक लाने और मुख्य वक्ता के आने तक भीड़ को बांधे रखने के काम आते रहे हैं। उनके कुछ गीत सामाजिक जीवन के विरोधाभास पर पर चोट करते तो कभी देश में व्याप्त भ्रष्टाचार पर तीखे प्रहार।

लोक संगीत के बड़े मंच और फेस्टिवल में उनके गीतों की प्रस्तुति गाँवों से ले कर महानगरों तक दर्शक बहुत चाव से सुनते और उनकी प्रस्तुति की छाप लोगों के दिलों दिमाग़ पर छा जाती थी।

जाजम फाउंडेशन के CEO विनोद जोशी ने बताया की 

जुम्मा को लोक संगीत में उनके मौसा और राजस्थान में भपंग को पहली बार राजस्थान में लाने वाले मरहूम उस्ताद श्री ज़हूर खा मेवाती जी ले कर आये थे। जुम्मा उनके समूह में भपंग बजाने का काम करते थे। 2004-2005 के जयपुर विरासत अंतरराष्ट्रीय फेस्टिवल में श्री जॉन सिंह जी ने अनोखी फ़ार्म में एक अनौपचारिक कार्यक्रम में जुम्मा के गायन की प्रतिभा को पहचाना और एक गायक के रूप में लोक संगीत रसिकों के सामने प्रस्तुत किया और संगीत रसिकों ने जुम्मा के गीतों और प्रस्तुति के अंदाज को खूब सराहा।

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धीरे धीरे जुम्मा का नाम देश और विदेश तक पहुँचने लगा। उसने इंग्लैंड के जेसन सिंह बीट बॉक्सर, ममफोर्ड एंड संस, धरोहर जैसे कोलैबोरेशन में काम किया और खूब नाम कमाया। जब जुम्मा की बहुमुखी प्रतिभा का परिचय हमारे देश के बड़े गायक और “कैलाशा बैड” प्रणेता श्री कैलाश जी खेर को हुआ तो उन्होंने जुम्मा को अपने कार्यक्रमों में बैंड का हिस्सा बनाया। जुम्मा से एक गीत श्री कैलाश खेर ने सीखा और वो गीत बेहद लोकप्रिय हुआ! यह गीत है “अकड़ बंब बम लहरी”।

नहीं रहे प्रसिद्ध भपंग वादक जुम्मा जोगी, राजस्थान के लोक संगीत को दिया नया आयाम

जुम्मा की लोकप्रियता का अंदाज़ा इस घटना से लगता है कि जब हमने मोमासर उत्सव सन २०११ में आरम्भ किया उस वर्ष जुम्मा अपने दल के साथ अपनी प्रस्तुति पहली बार दी और उसके अगले दस वर्षों तक गाँव के एक शर्त मेरे सामने रखते कि आप २०० कलाकार अपने हिसाब से लाना लेकिन हम गाँव वासियों की तरफ़ से एक ही माँग है और वो जुम्मा जोगी! उनकी यह शर्त हमें सन् २०२३ तक निभानी पड़ी जब तक हम मोमासर उत्सव करते रहे!

आज जुम्मा हमारे बीच नहीं है लेकिन उनके गीत, संगीत, सरल और सादा जीवन और उनसे मिले प्रेम को हम कभी नहीं भूल सकेंगे !

नहीं रहे प्रसिद्ध भपंग वादक जुम्मा जोगी, राजस्थान के लोक संगीत को दिया नया आयाम

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