कुंतासर गाँव में प्रेरणादायी नेत्रदान: तीजादेवी सहू ने मरणोपरांत दी रोशनी की अमूल्य भेंट
कुंतासर गाँव, तहसील श्रीडूंगरगढ़ के शांत और संस्कारी वातावरण में एक ऐसा घटनाक्रम घटा, जिसने पूरे क्षेत्र को मानवीय मूल्यों और नि:स्वार्थ सेवा की भावना से भर दिया। गाँव की प्रतिष्ठित महिला तीजादेवी सहू, धर्मपत्नी सावंताराम सहू, ने मरणोपरांत नेत्रदान कर समाज में मानवता की ऐसी मिसाल प्रस्तुत की है, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। यह सिर्फ एक धार्मिक या सामाजिक कर्म नहीं, बल्कि दो लोगों को नई रोशनी देने वाला जीवनदायिनी निर्णय है, जिसकी सराहना गाँव से लेकर पूरे क्षेत्र में हो रही है।
नेत्रदान की स्वीकृति: परिवार ने दिखाया अद्वितीय साहस
किसी प्रियजन के निधन के क्षण अत्यंत भावुक होते हैं, और ऐसे कठिन समय में नेत्रदान जैसा बड़ा निर्णय लेना केवल वही परिवार कर सकता है, जिसकी सोच मानव कल्याण की ओर अग्रसर हो।

तीजादेवी सहू के पुत्र पुरखाराम सहू, उनकी धर्मपत्नी किशनीदेवी, तथा परिवार के पौत्र
जगदीश, मुखराम, अमरचन्द, जयकरण सहू ने मिलकर इस पुण्य कार्य के लिए सहमति प्रदान की।
इस निर्णय के पीछे संवेदना, समझ और सेवा का गहरा भाव था। परिवार के सदस्यों ने कहा कि—
“माँ की आत्मा की शांति के लिए इससे बड़ा कोई दान नहीं हो सकता।”
नई पीढ़ी की उपस्थिति ने दिया एक संदेश
कार्यक्रम के दौरान परिवार के पड़पौत्र दीपांशु, तेजस्व, नितिन, गगन, ध्रुव और मानव भी मौजूद रहे।
बच्चों की इस उपस्थिति ने नेत्रदान जैसे मानवता-सेवा के कार्य को और अधिक भावनात्मक और प्रेरक बना दिया।
इसका संदेश स्पष्ट था—
मानवता की शिक्षाएँ केवल शब्दों से नहीं, बल्कि उदाहरणों से आगे बढ़ती हैं।
गाँव के गणमान्य लोग बने साक्षी
तीजादेवी सहू के नेत्रदान का यह क्षण केवल परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे कुंतासर गाँव का गौरव बन गया।
गाँव के वरिष्ठ और सम्मानित लोग —
मालाराम, आशाराम, मेघाराम, मोहनराम, सुगनाराम, किशनाराम, आदुराम, मुनीराम, रावताराम
आदि इस पुनीत कार्य के साक्षी बने।
गाँववासियों ने कहा कि—
“ऐसे प्रेरणादायक कार्य से समाज में नई सोच उत्पन्न होती है।”
प्राणनाथ हॉस्पिटल, सरदारशहर की टीम ने संवेदनशीलता से किया नेत्र संग्रहण
नेत्रदान प्रक्रिया को प्राणनाथ हॉस्पिटल, सरदारशहर की प्रशिक्षित टीम द्वारा पूर्ण किया गया। यह पूरा कार्य अत्यंत संवेदनशीलता, सावधानी और विशेषज्ञता के साथ किया गया, ताकि नेत्र सुरक्षित रूप से उन जरूरतमंदों तक पहुँच सकें जिन्हें इनकी सबसे ज्यादा आवश्यकता है।
नेत्रदान टीम ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती जागरूकता एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
डॉ. अंकित स्वामी और मुखराम सहू ने निभाई प्रेरक भूमिका
इस नेत्रदान के पीछे कई प्रेरक व्यक्तित्वों की भूमिका रही।
डॉ. अंकित स्वामी, जो नेत्रदान जागरूकता अभियानों से वर्षों से जुड़े हैं, उन्होंने परिवार को नेत्रदान के महत्व की जानकारी दी और प्रक्रिया को सुगम बनाया।
साथ ही मुखराम सहू भी इस कार्य में लगातार सक्रिय और सहयोगी बने रहे।

तेरापंथ युवक परिषद् श्रीडूंगरगढ़ का समर्पण
नेत्रदान की सूचना मिलते ही तेरापंथ युवक परिषद् श्रीडूंगरगढ़ की टीम तुरंत सक्रिय हो गई।
इसमें
संयोजक अशोक झाबक
अध्यक्ष विक्रम मालू
उपाध्यक्ष चमन श्रीमाल
का त्वरित सहयोग और सेवा भाव काबिले-तारीफ रहा।
उनके समय पर किए प्रयासों ने नेत्रदान प्रक्रिया को तेजी और पूर्णता से संपन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। तेरापंथ युवक परिषद की प्रेरणा से अन्य समाज का ये पहला नेत्रदान है
नेत्रदान : मानवता, करुणा और जीवन की नई किरण
नेत्रदान किसी भी व्यक्ति द्वारा किया जाने वाला सबसे मूल्यवान उपहार है।
दुनिया में लाखों लोग हैं जो अंधत्व से पीड़ित हैं और एक दाता की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो व्यक्तियों को नई रोशनी मिल सकती है।
तेजादेवी सहू का नेत्रदान—
✔️ दो लोगों की ज़िंदगी बदल देगा
✔️ परिवार और गाँव दोनों के लिए प्रेरणा बनेगा
✔️ समाज में सकारात्मक सोच और जागरूकता बढ़ाएगा
गाँव की प्रतिक्रिया: “एक अमूल्य देन — रोशनी का उपहार”
पूरे गाँव ने तीजादेवी सहू के परिवार की प्रशंसा करते हुए इसे मानवीय सेवा का बड़ा उदाहरण बताया।
गाँववासियों ने कहा—
“तीजादेवी सहू का नेत्रदान दो ज़िंदगियों में नई रोशनी बनेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। यह निर्णय पूरे गाँव का सम्मान बढ़ाने वाला है।”
नेत्रदान क्यों ज़रूरी है? – समाज के लिए बड़ा संदेश
भारत जैसे विशाल देश में लाखों लोग कॉर्निया ब्लाइंडनेस से पीड़ित हैं।
यदि समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़े, तो इनमें से अधिकांश को रोशनी मिल सकती है।
नेत्रदान से लाभ:
दो अंध व्यक्तियों को नई दृष्टि मिलती है
परिवार के लिए यह स्मरणीय पुण्य कार्य बनता है
समाज में जागरूकता और सकारात्मकता बढ़ती है
मृत्यु के बाद भी जीवन किसी और के लिए उपयोगी बनता है

कौन कर सकता है नेत्रदान?
कोई भी व्यक्ति उम्र, जाति, धर्म से परे
मृत्यु के 6 घंटे के भीतर नेत्र संग्रहण संभव
परिजनों की अनुमति आवश्यक
तीजादेवी सहू के परिवार ने दिया प्रेरणादायी संदेश
परिवार ने कहा कि—
“हमारी माता ने जीवनभर सेवा, सरलता और प्रेम का मार्ग अपनाया। हम चाहते थे कि उनके जाने के बाद भी वही मानवीयता आगे बढ़े। इसलिए नेत्रदान ही हमें सही मार्ग लगा।”
उनका यह फैसला गाँव, समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए अनुकरणीय उदाहरण है।



