होलिका दहन 2 मार्च को, 3 मार्च को धुलण्डी और चंद्रग्रहण—जानें शुभ मुहूर्त और सूतक का समय
होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल की प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा रहित वेला में करना शास्त्रोक्त बताया गया है। इस वर्ष फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी, सोमवार, 02 मार्च 2026 को सायं 05 बजकर 56 मिनट से पूर्णिमा प्रारम्भ होगी, जो अगले दिन 03 मार्च 2026, मंगलवार को सायं 05 बजकर 08 मिनट तक रहेगी।
अत: प्रदोषकाल में पूर्णिमा 02 मार्च 2026, सोमवार को ही प्राप्त होने से होलिका दहन इसी दिन होगा। इस दिन भद्रा सायं 05 बजकर 56 मिनट से अन्तरात्रि 05 बजकर 32 मिनट तक है। होलिका पर्व में यदि भद्रा निशीथ (अर्द्धरात्रि) को पार करके उषाकाल तक पहुॅंच जाती है तो भद्रा युक्त प्रदोष काल में होलिका दहन करना चाहिए।

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होलिका दहन के मुहूर्त :-
1. सालासर : सायं 06 बजकर 30 मिनट से सायं 06 बजकर 42 मिनट के मध्य व रात्री 01:30 होलिका दहन किया जा सकता है।
2. जयपुर : सायं 06 बजकर 24 मिनट से सायं 06 बजकर 36 मिनट के मध्य होलिका दहन किया जा सकता है।
3. उदयपुर : सायं 06 बजकर 34 मिनट से सायं 06 बजकर 46 मिनट के मध्य होलिका दहन किया जा सकता है।
धुलण्डी : 03 मार्च 2026, मंगलवार
होलिका दहन के अगले दिन ही धुलण्डी (धुलिवन्दन अथवा रंगोत्सव) का पर्व मनाया जाता है, इस दिन चन्द्रग्रहण का सूतक ग्रहण के 09 घण्टे पूर्व अर्थात् प्रात: 06 बजकर 20 मिनट से ही प्रारम्भ हो जायेगा।
धुलण्डी पर्व पर किसी प्रकार का धार्मिक अनुष्ठान, पूजन आदि कार्य नहीं होता है, यह केवल रंगोत्सव पर्व है, जिसमें सूतक आदि का दोष नहीं लगता है।

चन्द्रग्रहण का प्रभाव दोपहर 03 बजकर 20 मिनट से सायं 06 बजकर 48 मिनट तक रहेगा, अत: इसके पूर्व ही धुलण्डी का पर्व मना लेना चाहिए। ग्रहण मोक्ष सायं 06 बजकर 48 मिनट पर होगा, उसके बाद स्नान आदि से निवृत्त होकर धार्मिक कृत्य करने चाहिए।
होलिका दहन 2 मार्च को, 3 मार्च को धुलण्डी और चंद्रग्रहण—जानें शुभ मुहूर्त और सूतक का समय


