Hanumangarh Ethanol Plant Protest: टिब्बी में चौथे दिन भी तनाव बरकरार, ग्रामीणों का संघर्ष टकराव के दौर में पहुँचा
हनुमानगढ़ जिले के टिब्बी क्षेत्र में एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर पिछले चार दिनों से तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। Hanumangarh Ethanol Plant Protest अब एक स्थानीय पर्यावरणीय मुद्दे से आगे बढ़कर बड़े ग्रामीण आंदोलन का रूप ले चुका है। राठीखेड़ा गांव में निर्माणाधीन ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड प्लांट के विरोध में ग्रामीणों और प्रशासन के बीच खींचतान अब टकराव की स्थिति में पहुँच चुकी है।
स्थिति बेकाबू न हो, इसके लिए प्रशासन ने क्षेत्र में लगातार चौथे दिन भी इंटरनेट सेवाएं बंद रखने का फैसला लिया है। गांव में सन्नाटा पसरा है, कई घरों पर ताले लटक रहे हैं और ग्रामीण बड़ी संख्या में गुरुद्वारे में शरण ले रहे हैं। यह आंदोलन पिछले 16 महीनों से चल रहा है, लेकिन पिछले सप्ताह हुई झड़पों के बाद माहौल और संवेदनशील हो गया है।

गुरुद्वारा बना ग्रामीणों का सहारा — महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सुरक्षा तलाशते पहुँचे
Hanumangarh Ethanol Plant Protest के बीच टिब्बी का गुरुद्वारा सिंह सभा इस समय आंदोलनकारी किसानों और उनके परिवारों के लिए आश्रय स्थल बन गया है।
दर्जनों महिलाएं,
छोटे बच्चे,
बुजुर्ग किसान
यहां बीती रात से डेरा डाले हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस कार्रवाई के डर से वे अपने ही गांव में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। बुधवार को हुए बवाल में घायल कई लोगों का प्राथमिक उपचार भी इसी परिसर में किया जा रहा है।
गुरुद्वारे के अंदर अस्थायी इंतजाम किए गए हैं—
फर्श पर बिस्तर,
प्राथमिक इलाज,
खाने का इंतजाम
ग्रामीणों के सहयोग से जारी है।
महिलाओं का कहना है कि यदि एथेनॉल प्लांट शुरू हुआ तो गांव में दमा, कैंसर, त्वचा रोग और सांस से जुड़ी बीमारियाँ बढ़ जाएंगी। साथ ही भूजल और मिट्टी के प्रदूषण का खतरा भी बढ़ेगा।

क्यों भड़का Hanumangarh Ethanol Plant Protest?
राठीखेड़ा में प्रस्तावित यह एथेनॉल प्लांट 40 मेगावाट क्षमता वाला अनाज आधारित औद्योगिक प्रोजेक्ट है। सरकार इसे Ethanol Blended Petrol (EBP) कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण मानती है। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि—
पर्यावरणीय नुकसान होगा
भूजल स्तर तेजी से गिरेगा
प्रदूषण बढ़ेगा
खेतों के आसपास रहने वाले परिवारों को स्वास्थ्य जोखिम होंगे
पास के गांवों का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होगा
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि प्लांट की स्थापना से पहले सहमति लेने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही।

16 महीने का संघर्ष: शांतिपूर्ण आंदोलन से टकराव तक
Hanumangarh Ethanol Plant Protest कोई अचानक शुरू हुआ आंदोलन नहीं है। यह संघर्ष सितंबर 2024 में शुरू हुआ था। तब ग्रामीणों ने शांतिपूर्वक धरने देकर विरोध दर्ज कराया था। आंदोलन की प्रमुख समयरेखा इस प्रकार है:
📌 सितंबर 2024 – जून 2025
ग्रामीणों ने 10 महीने तक शांतिपूर्ण धरना दिया। कोई हिंसा नहीं हुई, केवल अपनी बात रखने के प्रयास हुए।
📌 जुलाई 2025
कंपनी ने प्लांट की बाउंड्री बनाने का काम शुरू किया। ग्रामीणों ने मौके पर जाकर इसका विरोध किया। पुलिस तैनात की गई।
📌 19 नवंबर 2025
पुलिस सुरक्षा में निर्माण दोबारा शुरू किया गया। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच कई बार झड़पें हुईं।
📌 दिसंबर 2025 — 4 दिन से इंटरनेट बंद
स्थिति गंभीर होने के कारण प्रशासन ने इंटरनेट बंद कर दिया है, ताकि अफवाहें न फैलें और भीड़ न जुटे।
इस दौरान कई किसान नेताओं को गिरफ्तार भी किया गया, जिससे ग्रामीणों में और नाराज़गी फैल गई। वर्तमान हालात में आंदोलन उग्र रूप ले चुका है।
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कंपनी और प्रशासन की दलीलें — रोजगार पर जोर, ग्रामीणों को भरोसा नहीं
ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड, जो चंडीगढ़ में रजिस्टर्ड है, का दावा है कि—
प्लांट से 700–800 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा
आसपास के क्षेत्रों में हजारों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा
किसानों की फसल की मांग बढ़ेगी
क्षेत्र का आर्थिक विकास होगा
प्लांट आधुनिक तकनीक पर आधारित होगा, इसलिए प्रदूषण का खतरा कम है
लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि—
रोजगार का दावा सिर्फ दिखावा है
प्लांट शुरू होने के बाद गांव के स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा
पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया पर सवाल हैं
कंपनी ने ग्रामीणों की सहमति नहीं ली
इस तरह दोनों पक्षों की राय में बड़ा अंतर दिखाई देता है, जिसकी वजह से Hanumangarh Ethanol Plant Protest और तेज़ होता जा रहा है।

एथेनॉल प्लांट को लेकर ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंताएँ
गांव में विरोध के प्रमुख कारण ये हैं—
1. पर्यावरण प्रदूषण
ग्रामीणों को डर है कि गैस, धुआं और रसायन आसपास की हवा को खराब करेंगे।
2. भूजल पर संकट
एथेनॉल उत्पादन के लिए भारी मात्रा में पानी की जरूरत होती है। पहले ही टिब्बी क्षेत्र में पानी का स्तर काफी नीचे है।
3. स्वास्थ्य जोखिम
दमा, कैंसर, त्वचा रोग जैसी बीमारियों के बढ़ने का डर ग्रामीणों के मन में सबसे बड़ा कारण है।
4. कृषि पर असर
फसलें प्रभावित होंगी और मिट्टी की क्षमता घट सकती है।
5. जानकारी की कमी
ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी और प्रशासन ने उन्हें समय पर पूरी जानकारी नहीं दी।
इन्हीं कारणों से यह आंदोलन सामान्य विरोध से बढ़कर बड़े पैमाने पर Hanumangarh Ethanol Plant Protest बन गया है।
गांव में माहौल: सन्नाटा, पुलिस तैनाती और इंटरनेट बंद
टिब्बी और आसपास के इलाकों में इस समय भारी पुलिस बल तैनात है।
बैरिकेडिंग
नाकाबंदी
चप्पे-चप्पे पर निगरानी
स्थिति को काबू में रखा जा रहा है।
इंटरनेट बंद होने से छात्रों, व्यापारियों और आम लोगों को दिक्कतें हो रही हैं। लेकिन प्रशासन का तर्क है कि इससे अफवाहें फैलने से रोकी जा सकती हैं।
क्या हल निकलेगा? अगले कदम पर टिकी निगाहें
Hanumangarh Ethanol Plant Protest इस समय एक निर्णायक मोड़ पर है। प्रशासन और ग्रामीणों के बीच भरोसे की कमी सबसे बड़ी बाधा है। आंदोलनकारियों की मांग है कि—
पहले प्लांट निर्माण रोका जाए
फिर बातचीत हो
ग्रामीणों की सहमति से आगे का फैसला किया जाए
वहीं प्रशासन चाहता है कि गांव में शांति वापस लौटे, ताकि संवाद का रास्ता खुल सके।
अगले कुछ दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी कि आंदोलन किस दिशा में जाएगा।

