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दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त 2025, जानें घर और दुकान में पूजा का शुभ समय कब से कब तक रहेगा

दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त 2025, जानें घर और दुकान में पूजा का शुभ समय कब से कब तक रहेगा

दिवाली पर लक्ष्मी गणेश और कुबेर महाराज की पूजा का शुभ समय कब है। दुकान, ऑफिस और घर में किस समय दिवाली पूजन करना होगा शुभ। पंचांग की गणना से जानें दिवाली पूजन का शुभ मुहूर्त और चौघड़िया। ताकि आपकी दिवाली की पूजा आपके घर में स्थिर लक्ष्मी को लकर आए। तो आइए जानें दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त विस्तार से।

दिवाली पर स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए शुभ मुहूर्त में पूजा का विधान है। शास्त्रों में बताया गया है कि गृहस्थजनों को स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए स्थिर लग्न में दिवाली का पूजन करना चाहिए इससे गृहस्थजनों से स्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पंचांग की गणना बता रही है कि इस साल कार्तिक अमावस्या का आरंभ 20 अक्टूबर को दोपहर के बाद 3 बजकर 45 मिनट से हो रहा है। जबकि अमावस्या तिथि 21 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। ऐसे में 20 अक्टूबर को ही प्रदोष काल में और महानिशीथ काल में अमावस्या तिथि व्याप्त होने से 20 अक्टूबर को ही दिवाली मनाई जा रही है। ऐसे में व्यापारीगणों को व्यावसायिक प्रतिष्ठान में लक्ष्मी पूजन किस समय करना चाहिए। जबकि गृहस्थ जनो के लिए दिवाली पूजन का शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहेगा और महानिशीथ काल में पूजन के लिए शुभ समय कब से कब तक रहेगा। आइए जानते हैं दिवाली पूजन का शुभ मुहूर्त।

दिवाली पूजन का शुभ मुहूर्त दुकान और व्यापारिक प्रतिष्ठान में

ज्योतिषीय नियम के अनुसार कारोबार में लाभ और उन्नति के लिए दुकान, व्यापारिक प्रतिष्ठान, ऑफिस में दिवाली पूजन का शुभ मुहूर्त कुंभ लग्न में लेना चाहिए। अबकी बार कार्तिक अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को शाम 3 बजकर 45 मिनट से जब लगेगी उस समय कुंभ लग्न उदित रहेगा। ऐसे में व्यापारिक प्रतिष्ठा में दिवाली पूजन शाम 3 बजकर 45 मिनट से करना चाहिए। दिवाली पर कुंभ लग्न शाम 4 बजकर 5 मिनट तक है। ऐसे में 3 बजकर 45 मिनट से 4 बजकर 5 मिनट तक का समय दुकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान में पूजन शुरू करने के लिए श्रेष्ठ है।

दिवाली पूजन का शुभ मुहूर्त घर में

गृहस्थजनों को दिवाली पूजन के लिए प्रदोष काल का समय लेना चाहिए। शास्त्रों में बताया गया है कि घर में गृहस्थजनों को दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन के लिए स्थिर लग्न का चयन करना चाहिए। अबकी पर प्रदोष काल का आरंभ तो 5 बजकर 47 मिनट पर हो जाएगा लेकिन इस समय चर लग्न मेष प्रभाव में रहेगा। जबकि स्थिर लग्न वृषभ का आरंभ शाम 7 बजकर 8 मिनट पर होगा। ऐसे में शाम में 7 बजकर 8 मिनट से शाम 8 बजकर 57 मिनट से पहले दिवाली पूजन करना गृहस्थजनों के लिए श्रेष्ठ रहेगा। इस समय शुभ और अमृत चौघड़िया का होना उत्तम संयोग बना रहा है। आपको बता दें कि दिवाली की शाम में रात 8 बजकर 17 मिनट पर हस्त नक्षत्र समाप्त हो जाएगा। इसके बाद चित्रा नक्षत्र का आरंभ हो जाएगा।

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दिवाली पर महानिशीथ काल में पूजा

दिवाली की रात को तंत्र मंत्र और साधना की रात भी कहते हैं। दिवाली की रात जो जातक तांत्रिक विधि से दिवाली की पूजा करते हैं। काली, बगलामुखी देवी की साधना करते हैं उनको महानिशीथ काल का समय पूजन के लिए लेना होता है। दिवाली पर 20 अक्टूबर को रात 11 बजकर 41 मिनट से निशीथ काल लग जाएगी और रात 12 बजकर 31 मिनट तक निशीथ काल व्याप्त रहेगी। ऐसे में सिंह लग्न और चित्रा नक्षत्र के संयोग में महानिशीथ काल में दिवाली पूजन करना श्रेष्ठ होगा।

दिवाली पूजा मुहूर्त और शुभ चौघड़िया

अमावस्या तिथि का आरंभ शाम 3 बजकर 45 पर हस्त नक्षत्र रात 8 बजकर 17 मिनट तक

चित्रा नक्षत्र का आरंभ रात में 8 बजकर 17 मिनट से कुंभ लग्न का आरंभ दिन में 2 बजकर 8 मिनट से वृषभ लग्न का आरंभ शाम 7 बजकर 8 मिनट से

महानिशीथ काल रात में 11 बजकर 41 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक

शुभ चौघड़िया शाम में 5 बजकर 47 मिनट से 7 बजकर 22 मिनट तक अमृत चौघड़िया शाम में 7 बजकर 22 मिनट से 8 बजकर 57 मिनट तक।

व्यावसिक प्रतिष्ठान और दुकान में दिवाली पूजा का शुभ समय 3 बजकर 47 मिनट से 4 बजकर 5 मिनट तक उत्तम।

घर में दिवाली पूजन का शुभ मुहूर्त शाम में 7 बजकर 8 मिनट से 8 बजकर 17 मिनट तक सर्वोत्तम

दिवाली पर तांत्रिक पूजा का शुभ मुहूर्त रात में 11 बजकर 11 बजकर 41 मिनट से 12 बजकर 31 मिनट तक

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