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BIG BREAKING: श्रीडूंगरगढ़ में करोड़ों की जमीन का बड़ा फर्जीवाड़ा — नकली आधार, फर्जी दस्तखत और दफ्तर की लापरवाही से मृत 3 लोग ‘जिंदा’ दिखाकर 16.72 हेक्टेयर खेत बेच दिए

BIG BREAKING: श्रीडूंगरगढ़ में करोड़ों की जमीन का बड़ा फर्जीवाड़ा — नकली आधार, फर्जी दस्तखत और दफ्तर की लापरवाही से मृत 3 लोग ‘जिंदा’ दिखाकर 16.72 हेक्टेयर खेत बेच दिए
BIG BREAKING: श्रीडूंगरगढ़ में करोड़ों की जमीन का बड़ा फर्जीवाड़ा — नकली आधार, फर्जी दस्तखत और दफ्तर की लापरवाही से मृत 3 लोग ‘जिंदा’ दिखाकर 16.72 हेक्टेयर खेत बेच दिए

जमीन को सबसे सुरक्षित निवेश मानने वाले अब सावधान हो जाएं। श्रीडूंगरगढ़ से ऐसी बड़ी खबर आई है जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। ओसवाल समाज की जमीन को एक गैंग ने इस तरह फर्जीवाड़े से बेच दिया जैसे यह कोई आम सौदा हो और सबसे बड़ा झटका यह कि खेत के तीन हिस्सेदार कई साल पहले मर चुके थे।

 16.72 हेक्टेयर जमीन… और मालिकों को भनक तक नहीं लगी

लखासर की रोही खसरा नम्बर 187 में ओसवाल परिवार की 16.72 हेक्टेयर जमीन को कुछ बाहरी लोगों ने स्थानीय सहयोगियों की मदद से बेच डाला।

जब असली वारिस जितेंद्र कुमार बोथरा को जमाबंदी दिखाई गई तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

“हमने बेचा ही नहीं… जमीन किसी और की हो गई।”

 BIG TWIST: जो तीन लोग मर चुके, वे 11 नवंबर को रजिस्ट्री कराने कैसे पहुंच गए? 

यह घटना किसी फिल्म की कहानी लगती है, पर है 100% सच।

जिन तीन लोगों ने कथित तौर पर जमीन बेची, उनकी मृत्यु प्रमाण पत्र मौजूद हैं-

डालचंद बोथरा : निधन 29 जून 2013

मूली देवी : निधन 31 जनवरी 1996

जीवराज : निधन 16 मार्च 1994

इसके बावजूद रजिस्ट्री रिकॉर्ड कहता है कि ये तीनों 11 नवंबर को “हाजिर” थे और उन्होंने खेत बेच दिया।

 फर्जी आधार कार्ड बनकर तैयार, दो लोग ‘गवाह’ बने

इस फर्जी बेचान में बड़े ही चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि जो लोग कई वर्षों पहले दुनिया छोड़ गए हैं उनके नाम से फर्जी आधार कार्ड भी इस गैंग ने बना लिए। इस पूरे खेल में प्रथम दृष्टया क्रेता लिछमण सिंह पुत्र भंवरसिंह राजपूत निवासी कोलासर, श्रीकोलायत बीकानेर का नाम सामने आ रहा है वहीं इस फर्जीवाड़े में गवाह बने ये दो लोग-

चंद्रप्रकाश पंचारिया (कोलायत)

हीरालाल पड़िहार (बीकानेर)

दोनों ने साक्षी बनकर मृत लोगों को “जिंदा विक्रेता” के रूप में पेश कर दिया।

सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि 17 नवंबर को उप पंजीयक कार्यालय में रजिस्ट्री आराम से हो गई।

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 रजिस्ट्री कार्यालय की लापरवाही साफ, लेखन में लेखक का नाम गायब

दूसरी बार ऐसा मामला सामने आने से समाज में गहरा रोष है। रजिस्ट्री लेखन में लेखक का नाम और मुहर लगी होती है या वकील के हस्ताक्षर होते हैं परन्तु उपपंजीयक कार्यालय ने बिना लेखक के नाम व हस्ताक्षर के लापरवाही पूर्वक फर्जी बेचान का पंजीयन कर दिया। आमजन उप पंजीयक कार्यालय की शैली पर भी गंभीर सवाल उठाने लगे हैं और इस बेचान में मिलीभगत का आरोप लगा रहे हैं।

ओसवाल समाज ने विधायक से मांग की है कि इस गैंग पर तुरंत कार्रवाई हो और रजिस्ट्री विभाग को जवाबदेह ठहराया जाए।

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 क्षेत्र में दहशत: “हमारे खेत कहीं बिक तो नहीं गए ?”

इस घटना के बाद प्रवासी ओसवाल परिवारों में डर बढ़ गया है।

खेत मालिकों का कहना है कि व “अब जमीन भी चोरी होने लगी तो हम किस पर भरोसा करें?”

विधायक ताराचन्द सारस्वत ने कहा कि ऐसे लोगों पर सख्ती किये बिना कुछ नहीं होगा। इनके खिलाफ एफआईआर होनी चाहिए और मैं उप पंजीयक कार्यालय को इस पर सख्ती करने के निर्देश देता हूँ।

एसडीएम शुभम शर्मा ने कहा कि जमीन के वारिस एक लिखित में शिकायत उप पंजीयक कार्यालय में देवें। इसकी प्राथमिक जांच करके आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावर्ती न हो।

तहसीलदार श्रीवर्द्धन शर्मा से जब इसे बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा कि “उप पंजीयक कार्यालय सभी प्रकार के दस्तावेजों की पड़ताल करने के बाद पंजीयन करता है। अगर, फिर भी यह भूल हुई है तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। और अब पंजीयन में और ज्यादा सख्ती बरती जाएगी।

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