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सेना के जांबाज की ड्यूटी पर लौटते समय सड़क हादसे में मौत, खेजड़ा गांव में पसरा मातम | सरदारशहर में मिनी बस से दर्दनाक टक्कर

सेना के जांबाज की ड्यूटी पर लौटते समय सड़क हादसे में मौत, खेजड़ा गांव में पसरा मातम | सरदारशहर में मिनी बस से दर्दनाक टक्कर

सेना के जांबाज की ड्यूटी पर लौटते समय सड़क हादसे में मौत, खेजड़ा गांव में पसरा मातम | सरदारशहर में मिनी बस से दर्दनाक टक्कर

चूरू जिले में रविवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। सरदारशहर मेगा हाईवे पर वन विभाग कार्यालय के सामने सेना के जवान तखुराम बाना (34) की मिनी बस से टक्कर होने पर मौके पर ही मौत हो गई। तखुराम भारतीय सेना में जम्मू-कश्मीर में तैनात थे और छुट्टी काटकर ड्यूटी पर वापस लौट रहे थे। लेकिन घर लौटने का इंतजार कर रहे साथियों और यूनिट के अधिकारियों तक यह खबर पहुंचने से पहले ही यह दुर्घटना उनकी जिंदगी का आखिरी पड़ाव बन गई।

इस हादसे ने न केवल खेजड़ा गांव बल्कि पूरे इलाके में शोक की लहर फैला दी है। जवान के पिता, पत्नी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव का हर व्यक्ति तखुराम को एक बहादुर बेटा, एक प्रेरणा और हमेशा दूसरों के लिए आगे रहने वाले इंसान के रूप में याद कर रहा है।


कैसे हुआ हादसा—बस स्टैंड से पहले ही अचानक मौत में बदल गई यात्रा

रविवार शाम करीब साढ़े 6 बजे तखुराम बाना अपनी बाइक से सरदारशहर की ओर जा रहे थे। उनका प्लान था कि वे सरदारशहर बस स्टैंड से जयपुर के लिए बस पकड़ेंगे और वहां से जम्मू-कश्मीर के लिए फ्लाइट अथवा ट्रेन लेंगे। इसी दौरान जब वे वन विभाग कार्यालय के सामने मेगा हाईवे पर पहुंचे, तभी पीछे से तेज रफ्तार में आ रही एक मिनी बस ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तखुराम सड़क पर कई फीट दूर जा गिरे। सिर और सीने में गंभीर चोटों के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के तुरंत बाद मौके पर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए और पुलिस को सूचना दी गई। लोगों ने बताया कि बस काफी तेज रफ्तार में थी और चालक ने बस को नियंत्रित नहीं कर पाया। हादसा होते ही ड्राइवर मौके से फरार हो गया।


मिनी बस को पुलिस ने किया जब्त, चालक की तलाश जारी

घटना की सूचना मिलते ही सरदारशहर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने मिनी बस को कब्जे में ले लिया और थाने में खड़ा करवा दिया है।
हालांकि चालक अभी तक फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। घटनास्थल के आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पुलिस ने ड्राइवर की पहचान की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चालक को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उसके खिलाफ लापरवाही से मौत का मामला दर्ज होगा। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि मेगा हाईवे पर आए दिन तेज रफ्तार वाहन हादसों का कारण बनते हैं, लेकिन इस बार हादसे ने एक जवान की जान ले ली, जिससे लोगों में भारी आक्रोश है।

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2013 में भारतीय सेना में हुए थे भर्ती, कई वर्षों से जम्मू-कश्मीर में दे रहे थे सेवाएं

तखुराम बाना तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके बड़े भाई खेती-बाड़ी का काम संभालते हैं, जबकि तखुराम ने बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखा था।
उनका सपना 2013 में पूरा हुआ, जब वे भारतीय सेना में भर्ती हुए। जवान के रूप में उन्होंने कई बार जम्मू-कश्मीर और उत्तरी भारत के कई संवेदनशील इलाकों में सेवाएं दीं।

तखुराम अपने अनुशासन, बहादुरी और सरल स्वभाव के लिए अपनी यूनिट में विशेष पहचान रखते थे। छुट्टी के दौरान भी वे अपने साथियों के संपर्क में रहते और ड्यूटी के हालचाल लेते थे।
उनके साथी बताते हैं कि तखुराम बेहद जिम्मेदार और सकारात्मक सोच वाले जवान थे।


छुट्टी पर आए थे और ड्यूटी के लिए लौट रहे थे

3 नवंबर को तखुराम छुट्टी पर अपने गांव खेजड़ा आए थे। घर, परिवार और गांव के लोगों से मिलने के बाद रविवार को उनकी छुट्टी समाप्त हो रही थी। उसी दिन वे सरदारशहर से जयपुर और फिर जम्मू-कश्मीर जाने वाले थे।
लेकिन बस स्टैंड तक पहुंचने से पहले ही हादसे ने सब कुछ खत्म कर दिया।

परिवार को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि घर से विदा होकर निकल रहे तखुराम कभी दोबारा घर नहीं लौटेंगे।
उनकी पत्नी पुष्पा ने तो उन्हें जाते समय सिर्फ इतना कहा था—“जल्दी आ जाना और ध्यान रखना।”
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

सेना के जांबाज की ड्यूटी पर लौटते समय सड़क हादसे में मौत, खेजड़ा गांव में पसरा मातम | सरदारशहर में मिनी बस से दर्दनाक टक्कर


परिवार में मातम—पिता और भाइयों की हालत खराब, पत्नी बार-बार बेहोश हो रही

तखुराम के पिता श्रवण कुमार बाना का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवारजन बताते हैं कि हादसे की खबर मिलने पर पिता बेहोश हो गए और उन्हें संभालना मुश्किल हो गया।
घर पर तखुराम की पत्नी पुष्पा भी बार-बार बेहोश हो रही हैं।
उनकी आंखों में सिर्फ यही सवाल है — “मेरी जिंदगी क्यों उजड़ गई?”

जवान अपने पीछे 10 साल के बेटे निर्जन को छोड़ गए हैं। निर्जन अभी गांव के स्कूल में पढ़ता है। पिता की मौत के बाद वह इस बात को समझ तो नहीं पा रहा, लेकिन घर में मातम देखकर बेहद सहमा हुआ है।

तखुराम की शादी कोहिना गांव में हुई थी। ससुराल पक्ष में भी माहौल बहुत गमगीन है। गांव में हर किसी की आंखें नम हैं क्योंकि उन्होंने एक बेटा, एक भाई, एक जवान और एक प्रेरणा खो दी है।


गांव के युवाओं के लिए थे प्रेरणास्रोत—सेना में भर्ती होने के लिए करते थे प्रोत्साहित

तखुराम जब भी गांव आते थे, तो युवाओं से मिलना नहीं भूलते थे।
वे गांव के लड़कों को शारीरिक तैयारी, सेना भर्ती प्रक्रिया और अनुशासन के बारे में गाइड करते थे।
उनके दोस्त दीपाराम गोदारा बताते हैं—

“तखुराम कहते थे कि सेना सिर्फ नौकरी नहीं, देश सेवा की जिम्मेदारी है। कई लड़के उनकी बात सुनकर तैयारी में लगे हुए हैं।”

गांव के लोग बताते हैं कि तखुराम जितने अच्छे जवान थे, उतने ही अच्छे इंसान भी थे।
गांव में किसी के भी घर में शादी, कार्यक्रम या परेशानी हो—तखुराम हमेशा मदद के लिए तैयार रहते थे।


अंतिम यात्रा आज पहुंचेगी गांव—सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

सरदारशहर उप जिला अस्पताल की मोर्च्यूरी से आज तखुराम का पार्थिव शरीर उनके गांव खेजड़ा ले जाया जाएगा।
सेना के जवानों के साथ, सम्मान गार्ड और पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

गांव वालों के अनुसार, जब तखुराम का पार्थिव शरीर गांव पहुंचेगा तो हजारों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने आएंगे।
यह विदाई न केवल एक जवान के सम्मान की होगी, बल्कि उस बेटे की भी होगी जिसने अपने गांव, अपने परिवार और अपने देश का नाम रोशन किया।


लगातार बढ़ रहे सड़क हादसे—गांव वालों ने की सुरक्षा बढ़ाने की मांग

चूरू और आसपास के लोगों ने स्थानीय प्रशासन से मेगा हाईवे पर स्पीड कंट्रोल, ब्रेकर या पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाने की मांग की है।
गांव वालों का कहना है कि तेज रफ्तार बसें और मिनी बसें आए दिन खतरा बनती जा रही हैं।
तखुराम जैसा युवा और बहादुर जवान भी इस लापरवाही की भेंट चढ़ गया।


तखुराम की याद हमेशा रहेगी—एक बहादुर सैनिक जिनका सफर अधूरा रह गया

तखुराम का जीवन अनुशासन, मेहनत और सेवा से भरा हुआ था।
उनका अंतिम सफर भले ही छोटा हो गया, लेकिन उनकी यादें, उनकी सीख और उनका जज्बा हमेशा गांव और परिवार में जिंदा रहेंगे।

गांव वाले कहते हैं —
“हमने सिर्फ एक इंसान नहीं खोया, हमने अपना गौरव खो दिया।

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