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सूडसर धूपड़़ परिवार ने सत्यनारायण जी के निधन पर “ओढा़वणी परंपरा” को त्यागा

सूडसर धूपड़़ परिवार ने सत्यनारायण जी के निधन पर "ओढा़वणी परंपरा" को त्यागा

सूडसर धूपड़़ परिवार ने सत्यनारायण जी के निधन पर “ओढा़वणी परंपरा” को त्यागा

सूडसर एवं आस-पास के गांवों डॉक्टर साहब के नाम से विख्यात प्रचलित श्री सत्यनारायण जी धूपड़ का निधन 18 अप्रैल 2026 को हो गया था। अंतिम यात्रा में मेढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं समाज सेवक व विभिन्न पार्टियों के नेतागणों ने हिस्सा लिया और भाव-भीनी श्रद्धांजलि दी।

मरणोपरांत कई रस्में होती है जिसमें ओढावणी की रस्म को कभी किसी जमाने में महत्वपूर्ण माना जाता था। आज पढ़े लिखे व्यक्ति और समझदार इस ओढावणी की कूपरंपरा को धीरे-धीरे हटा रहे हैं। सूडसर निवासी सत्यनारायण जी के पुत्र राजकरण जी, मनोज कुमार जी का मानना है कि पिता सत्यनारायणजी ने अपने जीवन में लोगों की सेवा की और परिवार में रहकर ही संत जीवन जिया।

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समाज में रहकर लोगों को अच्छी राह दिखाई ऐसे महान व्यक्तित्व के पीछे ओढावणी की प्रथा का हम त्याग करते हैं। सत्यनारायण जी के सुपोत्र विष्णु सोनी ने बताया कि 28 अप्रैल को डांगड़ी-रात एवं गंगा प्रसादी 29 अप्रैल को है। 29 अप्रैल के दिन कोई भी सगे-संबंधी के द्वारा ओढावणी के नाम पर कोई भी वस्त्र एवं नगदी नहीं ली जाएगी।

इन्होंने बताया कि मेरे दादाजी ने समाज में उल्लेखनीय कार्य किया, महान व्यक्तित्व के धनी थे “दादाजी”। बताया कि दादाजी के नाम पर किसी का एक रुपया भी खर्च हम नहीं करवाना चाहते इसलिए ओढावणी की परंपरा को पूरी तरह से हम पूरा सूडसर धूपड़ परिवार त्याग करते हैं।

सूडसर धूपड़़ परिवार ने सत्यनारायण जी के निधन पर "ओढा़वणी परंपरा" को त्यागा

साथ ही साथ इन्होंने उपरोक्त 28 अप्रैल एवं 29 अप्रैल के धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने की प्रार्थना सभी से की है। मेढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार समाज के पूर्व पहलवान सामाजिक कार्यकर्ता महावीर कुमार सहदेव ने भी इस कार्य की सराहना की और इस अवसर पर कहा कि इस तरह की कू प्रथाएं हर एक परिवार को हटा देनी चाहिए।

सूडसर धूपड़़ परिवार ने सत्यनारायण जी के निधन पर “ओढा़वणी परंपरा” को त्यागा

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