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हिंदू नववर्ष संवत् 2083 – पंचांग, ज्योतिष एवं भविष्यफल

हिंदू नववर्ष संवत् 2083 – पंचांग, ज्योतिष एवं भविष्यफल

हिंदू नववर्ष संवत् 2083 – पंचांग, ज्योतिष एवं भविष्यफल

श्री गणेशाय नमः

वक्रतुण्ड ! महाकाय ! कोटिसूर्यसमप्रभ !

निर्विघ्नं कुरु मे देव! सर्वकार्येषु सर्वदा ।।

काशीशं गणनायकं सुरगुरुं देवीं तथा श्रीपतिं।

स्तुत्वा वायुसुतं सभक्ति मनसा ध्यात्वा च नत्वा गुरुम्।।

स्वर्गीयं पितरं नमामि विवुधं श्री जीवनाथं हितम्।

नित्यं लोकहिताय यस्य कृपया पञ्चाङ्ग मातन्यते।।

भारतीय नववर्ष संवत् २०८३ शुभकामनाओं के साथ मंगमय हो ।।पंडित अनंत पाठक …..

परमेश्वर अजर अमर और अविनाशी हैं । परमात्मा की जन्म मृत्यु नहीं होती।

गीता अध्याय ८ मे श्लोक सं.१६ में स्पष्ट है।

आब्रह्म भुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनो ऽर्जुन ।

मामुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते ॥

हे अर्जुन! इस भौतिक सृष्टि के सभी लोकों में ब्रह्मा के उच्च लोक तक तुम्हें पुनर्जन्म प्राप्त होगा। हे कुन्ती पुत्र! परन्तु मेरा धाम प्राप्त करने पर फिर आगे पुनर्जन्म नहीं होता।

लूणकरणसर (श्रेयांस बैद):वैदिक ग्रंथों में पृथ्वी लोक से नीचे सात लोकों-(तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल,और पाताल) के अस्तित्व का वर्णन किया गया है। इन सबको नरक या नरक लोक कहा जाता है। पृथ्वी लोक से आरम्भ होकर इसके उपर सात लोक-(भूः, भूवाः, स्वाः, महाः, जनः, तपः, और सतयः लोक) अस्तित्व में हैं। इन सबको ‘स्वर्ग’ या ‘देवलोक’ भी कहा जाता है।

√ सृष्टि में भिन्न-भिन्न ग्रह जिनका अस्तिव है, उन्हें विभिन्न लोक कहा गया है। हमारे भौतिक ब्रह्माण्ड में 14 लोक हैं। इसमें सबसे उच्चतम ब्रह्मा का लोक है जिसे ब्रह्मलोक कहा जाता है। इन सभी लोकों में माया का प्रभुत्व रहता है। इन लोकों के निवासी जन्म-मृत्यु के चक्र के अधीन होते हैं।

यहाँ तक कि स्वर्ग के राजा की भी एक दिन मृत्यु होती है।

इस लोक के सभी प्राणी तथा यहां के मालिक का भी जन्म मृत्यु होती है।

ब्रह्मा की आयु १०० दिव्य वर्षों के तुल्य होती है। इसे एक परा अथवा एक महाकल्प भी कहते हैं।

ब्रह्मा का एक दिन, एक महायुग के तुल्य है, जो चार युगों से मिल कर बनता है। हमारे धर्म में चक्रीय समय की कल्पना की गई है, जिसमें घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रहती है।

पुराणों के अनुसार मनुष्य के ३६०दिन के मनुष्य का एक वर्ष मनुष्य के एक वर्ष देवताओं का एक दिन होता है। देवताओं के ३६० दिन का देवताओं का एक वर्ष होता है।

देवाताओं के बारह सौ वर्षों का एक कलियुग होता है और द्वापर, त्रेता और सत्युग की अवधि क्रमशः इसकी दुगुनी, तिगुनी व चौगुनी होती है। चार युगों की अवधि को चतुर्युग कहते हैं।

ऐसे एक हजार चतुर्युगों का ब्रह्मा का एक दिन व इतने ही अवधि की उनकी एक रात होती है। इस एक हजार चतुर्युग की अवधि को कल्प कहा गया है। सृष्टि ब्रह्मा के जागरण काल में उनके सङ्कल्प से उत्पन्न होती है और उनके सोने के साथ ही उनमें विलीन हो जाती है।

इस प्रकार ब्रह्मा द्वारा उत्पन्न सृष्टि का जीवनकाल ब्रह्मा के दिन पर्यन्त ही रहता हैै और ब्रह्मा की रात में वह अव्यक्त अवस्था में रहती है। इस प्रकार दो कल्पों का ब्रह्मा का एक दिन रात होता है। ऐसे ३६० दिन रात का ब्रह्मा का एक वर्ष होता है। ऐसे सौ वर्षों की ब्रह्मा की कुल आयु है। इस अवधि के बाद ब्रह्मा प्रकृति में लीन हो जाते हैं और सृष्टि में कुछ भी नहीं रह जाता।

वर्तमान ब्रह्मा की अपनी आयु के हिसाब से उनकी आयु के पचास वर्ष बीत चुके हैं और वर्तमान कल्प उनकी आयु के एक्यावन (५१) वें वर्ष का पहला दिन चल रहा है इस कल्प के भी चौदह मन्वान्तरों में से छह बीत चुके हैं और सातवें मन्वन्तर का अट्ठाइसवाँ कलियुग चल रहा है

हमारा समस्त ब्रह्माण्ड अत्यन्त विशाल,असीम एवं अनन्त हैं। हमारे जीवन आकाश गंगा में स्थित ग्रहो और नक्षत्रों पर आधारित होता है। हमारे सौरमण्डल में पृथ्वी से लेकर सभी ग्रह सूर्य से प्रकाशित होकर आस पास सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं । ग्रह मण्डल और तारो के समूह को आकाश गंगा के नाम से जानते है।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार ब्रह्मांड के सभी कार्य कलापों ग्रहों द्वारा नियंत्रित है आकाश में जो भी ग्रह और नक्षत्र है,उनका प्रभाव सारी पृथ्वी और सम्पूर्ण ब्रह्मांड पर रहता है,यह ज्योतिष का मूलभूत सिद्धान्त है।

हमारे पौराणिक साहित्य में सूर्य की उत्पत्ति और प्रलय का कारण माना गया हैं। ऋग्वेद के अनुसार ब्रह्म ने पूर्व कल्पो की भाँति ही सूर्य, चन्द्र , नक्षत्रों,पृथ्वी,आंतरिक तथा उनमें स्थित आकाशीय पिण्डो की रचना की है। ब्रह्मपुराण के अनुसार चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को अश्विनी नक्षत्र एवं मेष राशि मे सूर्योदय काल में सृष्टि की रचना हुई। उसी समय से ग्रहो ने अपनी-अपनी कक्षा में प्रति भ्रमण आरम्भ कर दिया।

सतयुग का मान- १७,२८००० सत्रह लाख अट्ठाइस हजार वर्ष।

त्रेता युग का मान- १२,९६००० बारह लाख छियान्नबे हजार वर्ष।

द्वापर युग का मान- ८,६४००० आठ लाख चौसंठ हजार वर्ष ।

कलयुग का मान- ४,३२००० चार लाख बत्तीस हजार वर्ष।

कलियुग की उतपत्ति विक्रमी संवत् आरम्भ से ३०४५ वर्ष पूर्व तथा ईसवी सन् शुरू होने से ३१०२ वर्ष पूर्व भाद्रपद मास कृष्णपक्ष त्रयोदशी तिथि ,रविवार आश्लेषा नक्षत्र व्यतिपात योग में अर्धरात्रि के समय हुई थी। जिसको कलि संवत के नाम से जानते हैं।

उसके बाद युधिष्ठिर सम्वत का प्रचनल रहा।

२०८२ वर्ष पूर्व विक्रमी संवत् का शुभारंभ हुआ है।

श्री श्वेत बाराह कल्प आरम्भ से व्यतीत वर्ष:- १,९५,५८,८५१२९ एक अरब पंचान्नबे करोड़ अट्ठावन लाख पच्चासी हजार एक सौ उन्तीस वर्ष।

अट्ठाइसवें कलयुग के आरम्भ से ५१२९ पांच हजार एक सौ उन्तीस वर्ष व्यतीत होगा

श्री विक्रमादित्य महराज के सासन काल से २०८२ वर्षव्यतीत होगा।

संवत्सर :- 12 महीने की अवधि काल को 1 संवत्सर कहते हैं जैसे चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, अगहन, पौष, माघ और फाल्गुन। संवत्सर के ६० वर्षो का एक चक्र होता जिससे प्रत्येक वर्ष का एक विशेष संवत्सर होता है। जिसे युगादि कहते हैं इसके प्रत्येक २० वर्षों के स्वामी ब्रह्मा, विष्णु और शिव होते है। २० वर्षो का प्रत्येक भाग एक बीसी या विंशति कहलाता है।

इस वर्ष विक्रमी संवत २०८३ के आरम्भ में शिव विंशति के अंतर्गत दशम युग का षष्टम् संवत्सर रौद्र नामक संवत्सर प्रारंभ होगा। यानि ५४ वां नया विक्रमी संवत्सर रौद्र संवत्सर होगा जो वर्ष पर्यंत संकल्पादि मे प्रयोग होगा।

इस संवत को महाराष्ट्र में इसे गुड़ी पड़वा, कर्नाटक युगादि, आंध्रा और तेलंगाना में उगादी, पंजाब में वैशाखी, कश्मीर में नवरेह, मणिपुर में सजिबु नोंगमा पानबा या मेइतेई चेइराओबा, सिंध में चेती चंड, गोवा और केरल में संवत्सर पड़वो नाम और अन्य राज्यों में विशु, चित्रैय तिरुविजा नाम से जाना जाता है।

रौद्र संवत् फल:- जनता मे रोग, राजाओं मे भयंकर युद्ध,तथा प्रजा को दुखी तथा प्रजा नाश होता है

संवत्सर का वास:- संवत्सर का निवास वैश्य के घर होने से सभी वस्तुएं महँगी होती हैं यह वर्ष मध्यम रहेगा।

रोहिणी का वास :-

इस वर्ष मेष संक्रांति का प्रवेश स्वाती नक्षत्र मे होने से रोहिणी का वास सन्धि मे होने से खण्ड वर्षा होगी।

समय वाहन फल:-समय का वाहन नौका के होने से चौपायों को पीड़ा संपूर्ण पृथ्वी फलों से रहित तथा जनता भ्रमित होगी

आर्द्रा नक्षत्र प्रवेश फल:- नवमी तिथि मे आर्द्रा प्रवेश होने से अति बृष्टि तथा मूषक, टिड्डी का प्रकोप होता है

वार फल:- सूर्य का आद्रा नक्षत्र में सोमवार को प्रवेश होने से सुभिक्ष कारक है।

नक्षत्र फल:- हस्त नक्षत्र में सूर्य के आर्द्रा में प्रवेश होने से सुख वर्धक होता है

योग फल:- वरीयान योग में सूर्य के आद्रा मे प्रवेश होने से अल्प बृष्टि होती है।

बेला फल:- आर्द्रा नक्षत्र का प्रवेश रात्रि काल में होने से फलों सस्य वर्धक है

नव मेघ फल:- काल नमक मेघ में अल्प वर्षा का योग है

चतुर्थ मेघ फल:- पुष्कर नामक मेघ में अल्प वर्षा का योग है

ग्रहण:-

इस वर्ष संवत् २०८३ में विश्व में कुल ३ ग्रहण होंगे। जिसमें २ सूर्य ग्रहण तथा १ चंद्र ग्रहण होंगे।

तीनो ग्रहणों मे से भारत मे कोई ग्रहण नहीं दिखाई देगा।

१- पहला सुर्य ग्रहण- श्रावण मास अमावस्या बुथवार १२ अगस्त २०२६ को

२- दूसरा चंद्र ग्रहण- श्रावण पूर्णिमा शुक्रवार २८ अगस्त २०२६ को

३- तीसरा चंद्र ग्रहण- माघ अमावस्या शनिवार ०६ फरवरी २०२७ को

कौन होंगे इस नववर्ष के राजा और मंत्री?

सनातन संस्कृति का नववर्ष जिस दिन प्रारम्भ होता है उस दिन के वार का स्वामी, उस वर्ष का राजा होत है

वैदिक पंचांगों के अनुसार,चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि की शुरु आत चैत्र कृष्ण अमावस्या १९ मार्च २०२६ को प्रातः ०६ बजकर ४० मिनट से होगी. जबकि, प्रतिपदा तिथि की समाप्ति २० मार्च को सूर्योदय से पूर्व ०५ बजकर २४ मिनट पर होगी ऐसे में प्रतिपदा तिथि की हानि होने से प्रतिपदा तिथि का मान गुरुवार दिन होने से हिंदू नववर्ष संवत् २०८३ की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा गुरुवार वार उत्तराभाद्रपद नक्षत्र ब्रह्म योग मे १९ मार्च २०२६ से होगा ।

इस वर्ष आकाशीय ग्रह समिति वा सभासदों की १० की टोली में राजा मंत्री के साथ ०८ विभाग शुभ ग्रहों को ०२

विभाग पाप वा क्रूर ग्रहों को प्राप्त हुआ है।।

रौद्र संवत्सर मंत्रिमंडल

राजा – गुरु (राष्ट्रपति)वित्त,खनिज, पेट्रोलियम

मंत्री – मंगल (प्रधानमंत्री)

धनेश – गुरु (वित्त)

नीरेश – गुरु ( पेट्रोलियम)

सस्येश – शुक्र (कृषि )

दुर्गेश – चंद्र (रक्षा)

रसेस – सूर्य (उद्योग वा खनिज)

फलेश – चंद (वन व पर्यावरण )

मेघेष – चंद्र (जल)

धान्येश – बुध ( खाद्य)

आकाश मंडल ग्रहों की स्थिति शुभाशुभ प्रकृति से अच्छे और बुरी घटनाएं घटित होती हैं l

राजा गुरु का फल :- इसवर्ष देव गुरु बृहस्पति के राजा होने से उत्तम वर्षा गायों में दूध की अधिकता अग्निहोत्री ब्राह्मण यज्ञ यज्ञादि करने वाले होंगे सबके घर में मंगल उत्सव होंगे

मंत्री मंगल का फल:- इस वर्ष मंगल को मंत्री होने से कर तथा रोग से लोगों को पीड़ा जनपदों में जय सुख की वृद्धि होगी

सस्येश शुक्र का फल :- कृषि फसलो के स्वामी शुक्र होने से सुंदर वर्षा गेहूं, धान, ईंख , नागरमोथा कंगुनी का उत्पादन अधिक तथा बृक्षों में फल फूल सुखप्रद होंगे

दुर्गेश चंद्र का फल : – इस वर्ष के दुर्गेश चंद्र देव के होने से सुव्यवस्थित शासन होने से जनता प्रसन्न रहेगी सुंदर वर्षा तथा गोरस वा रस पदार्थ का प्रयोग जनता द्वारा शासन का यशोगान होगा

धान्येश बुध का फल:- खाद्य पदार्थ के स्वामी बुध होने से पृथ्वी धान्य से युक्त रस पदार्थ महंगे होंगे राजा लोग नीति पूर्वक कार्य करने वाले होंगे

रसेश सूर्य का फल:- सूर्य रसेश हो तो वर्षा की कमी रस पदार्थ का उत्पादन कम भोग्य साधनों की कमी तथा मनुष्यों को घी, तेल, वस्त्र अधिक प्रिय होंगे राजा लोग सुख भोग करेंगे

धनेश (कोश पति) गुरु का फल :- गुरु के धनेश होने से वृक्ष फल फूल से सुशोभित तथा मनुष्य विविध द्रव्य से युक्त होंगे व्यापारी लोग तथा फूलों के रोजगारों को लाभ होगा

मेघेश (मौसम, वर्षा और पानी) चंद्र का फल :- मेघेश चंद्र देव के होने से अच्छी वर्षा राजा प्रमुदित तथा प्रजा को सदा सुख रहेगा

नीरसेश (धातु और व्यापार) गुरु का

फल :- नीरेश गुरू होने से हल्दी आदि पीले पदार्थ तथा पीतांबरादि वश्त्रों में लोगों की रुचि बढ़ेगी

फलेश (फल फूल के स्वामी ) चंद्र का फल:- चंद्र देव फलेश हो तो बृक्षों में अधिक फल फूल होंगे तथा विप्र लोग उत्तम भोग पदार्थों का भोग करेंगे तथा राजा लोग नीति निपुणता से व्यवहार करेंगे

मिश्रित फल:-

ग्रहों की स्थिति और संवत्सर के राजा गुरु होने के कारण देश मे आध्यात्मिक उन्नति और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में अकल्पनीय प्रगति होगी इसके साथ-साथ धर्म और आध्यात्मिकता की ओर लोगों का झुकाव बढ़ेगा. पूजा-पाठ और साधना करने वालों के लिए यह वर्ष विशेष फलदायी रहेगा तकनीक के बढ़ते उपयोग के कारण डिजिटल सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण होगी राजा बृहस्पति होने से विशेषकर कृषि और उत्पादन सेक्टर में रिकॉर्ड सफलता मिलने के योग हैं इस साल भारत किसी बड़ी खोज या नई तकनीक से दुनिया का ध्यान खींच सकता है. कृषि क्षेत्र में सुधार होगा और किसानों को अच्छे परिणाम मिलेंगे

लेकिन मंत्री मंगल के प्रभाव से समाज में उग्रता, विवाद और रक्त संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है भारत में विभिन्न घटनाएं घटित होंगी. भारत की राजनीति में बडे़ परिवर्तन देखने को मिलेंगे. भारत में पाकिस्तानी आतंकवादी हमला होने की संभावना प्रबल है.

पंजाब, बंगाल, कश्मीर, ओड़िसा और पूर्वोत्तर राज्य में समस्या उत्पन्न हो सकती है. भारत में जन आंदोलन हो सकता है जो भारत की राजनीति को अस्थिर करेगा.किसी घटना-दुर्घटना बड़ी जनहानि होने की संभावना है. भारत की सीमाओं पर तनाव बढ़ जाएगा. भारत में प्रदूषण अपने चरम पर होगा, मौसम और हवाओं से लोग परेशान रहेंगे.

कृतिक आपदाएं भूकंप, बाढ़,जल प्रलय की घटनाएं बढ़ जाएगी. गुरु और मंगल का संयोग कुछ विशेष परिवर्तनकारी घटनाओं का रहेगा,साथ ही गुरु की अतिचारी गति भी बहुत प्रभावित करेगी न्याय के देवता शनि की दृष्टि के कारण खनिज और तेल क्षेत्रों में कुछ प्रतिकूल प्रभाव दिख सकते हैं

ज्योतिष शास्त्र में इस तरह का संयोग असामान्य परिस्थितियों और तीव्र घटनाक्रमों का घातक माना जाता है. इस वर्ष प्रकृति में भी असाधारण हलचल देखने को मिल सकती हैं प्राकृतिक घटनाएं, मौसम में उतार-चढ़ाव और वातावरण में बदलाव लोगों को प्रभावित करेंगे तथा इस वर्ष साइबर अपराधों में वृद्धि होने की संभावना है भीषण गर्मी और मौसम की चरम स्थितियाँ परेशानी बढ़ा सकती हैं.

चंद्रमा की स्थिति एक सफल मानसून की ओर संकेत कर रही है, लेकिन बुध के प्रभाव से महंगाई में तेजी आ सकती है. सोना और चांदी (स्वर्ण-रजत) की कीमतों में भारी उछाल और उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा. सरकारी राजकोष में वृद्धि होगी, लेकिन सुरक्षा और स्वास्थ्य मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

उत्पत्ति विस्वा:-

धान्य ११ विश्वा, तृण ०५ शीत १३, तेज १३, ऊष्ण १७, वायु १३, वृद्धि १५, विनाश १५, विग्रह ११, क्षुधा ०३, तृष्णा ०१, निद्रा १७, आलस्य ०७, उद्दम् ०५, शांति ०७, क्रोध ०५, दम्भ ११, मैत्री १३, उत्सव ०९, पाप ०५, पुण्य ०७, उग्रता १३, रसोत्पत्ति ०७, फलोत्पत्ति ११, व्याधि ०३, व्याधि नाश ०९, आचार ०७, अनाचार १७, मृत्यु ०७, जन्म १३, चोर १५, अग्नि ०९, शमन ११, सत्य ०३, वर्षा १७, धर्म ०५, रत्न ११, वश्त्र ०९, अनावृष्टि १७, अतिवृष्टि ११, मूषक ०७, शूल ०९, सेवकत्व ०७ स्वामित्व १७, घृत ०९, तैल ०५, भेद ०१, उत्साह ०९, भैषज्य ०५

गुरू – वर्ष के आरंभ मे मिथुन राशि मे तथा ०३ जून २०२६ बुधवार से वर्ष पर्यन्त कर्क राशि पर गोचर मे रहेंगें। १५ जुलाई बुधवार २०२६ से पश्चिम में अस्त होंगे १० अगस्त २०२६ को पूर्वोदय होंगे १२ दिसंबर २०२६ से वर्ष पर्यन्त वक्री रहेंगे ।

शुक्र – आश्विन शुक्ल तृतीया १३ अक्टूबर २०२६ से पश्चिमास्त कार्तिक कृष्ण द्वितीया २८ अक्टूबर २०२६ पूर्व मे उदय होंगे

शनि – वर्ष पर्यन्त पूरे वर्ष मीन राशि में रहेंगे २६ जुलाई २०२६ से १० दिसंबर २०२६ तक वक्री रहेंगे। इसके बाद मार्गी वर्ष पर्यन्त मार्गी रहेंगे।

कुंभ राशि की उतरती मीन राशि की मध्य मेष राषि की चढ़ती साढेसाती पूरे वर्ष रहेगी।

सिंह राशि पर अष्टम ढैया

धनु राशि पर चतुर्थ ढैया

राहु – वर्षारम्भ से कुंभ राशि पर तथा ०३ दिसंबर २०२६ से पूरे वर्ष मकर राशि पर गोचर मे रहेंगें

केतु – वर्षारम्भ सिंह राशि पर तथा ०३ दिसंबर २०२६ से पूरे वर्ष कर्क राशि पर पूरे वर्ष गोचर मे रहेंगे।

 

मेष- वर्षारम्भ में गोचर से बृहस्पति की प्रतिकूलता से कार्य में व्यवधान तथा विलंबता बनी रहेगी परिजनों का रूखा व्यवहार तथा शरीर सुख में कमी वर्षारम्भ से शनि द्वादश भाव का होने से चढती साढेसाती से व्यय की अधिकता से आर्थिक स्थिति कमजोर पड़ जाएगी 03 जून से गुरु कुछ मध्यम हो जाएगा खर्चे पर नियंत्रण रखना पड़ेगा तथा स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना आवश्यक होगा पद प्रतिष्ठा में कुछ कमी आने की स्थितियां बनेगी तथा सभी अधीनस्थ कार्यों में विलंब होगा लौह पाद की चढ़ती शनि की साढेसाती के अरिष्ट फल से बचने के लिए हनुमान जी की आराधना शनिवार को तिल तेल का दीपक पीपल वृक्ष के नीचे जलाएं प्रत्येक गुरुवार को चने की दाल हल्दी और गुड़ गाय को खिलाएं

वृष- वर्षारम्भ से आपकी राशि से बृहस्पति द्वितीय भाव मे होने से धन का आगमन स्वास्थ्य में भी सुधार होगा विरोधी निष्क्रिय हो जाएंगे तथा अधीनस्थ सभी कार्यों में सफलता मिलने लगेगी राहु केतु अचानक कोई कार्य बनाएंगे 3 जून से बृहस्पति हल्का पड़ जाएगा कई समस्याएं खड़ी हो जाएंगी स्वास्थ्य भी प्रभावित रहेगा सगे संबंधियों से अनबन हो सकती है रोजी रोजगार में पव्यधान खड़े हो सकते हैं गुरु की शांति, उपाय करते रहें तो रास्ता निकलेगा

मिथुन- वर्षवर्षारंभ मे आपकी राशि में बृहस्पति गोचर से बहुविधि परेशानियां खड़ी करता है मान सम्मान में कमी आएगी शरीर को कई प्रकार की बीमारियां घेरेंगी आमदनी प्रभावित होगी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ेगा बुद्धि कम नहीं करेगी असमंजस बना रहेगा नौकरी में अधिकारियों से विवाद झगड़ा से दूर रहे अन्यथा अपमानित होना पड़ सकता है

3 जून से बृहस्पति परिवर्तित होकर के सभी परेशानियों का हाल करेगा रुके हुए अधूरे कार्य पूर्ण होंगे तथा स्वास्थ्य में भी सुधार होगा घर परिवार में विवाह पुत्र जन्म मांगलिक कार्य के अवसर आएंगे शत्रुओं का समन होगा आकास्मत कोई अस्थाई लाभ हो सकता है गुरु, शनि की शांति से आराम मिलेगा। ॐ बृं बृहस्पतये नमः का जाप एवं गुड़, चने की दाल,हल्दी गाय को खिलाएं ब्राह्मण को पुस्तक एवं चने की दाल,गुड,हल्दी, पीला वश्त्र,पीला फल दान करें और शनि के लिए हनुमान जी की प्रार्थना तथा शनि की पूजा लाभकारी होगी

कर्क- कर्क राशि वालों के लिए यह वर्ष मध्य फल कारक है आप अपना कार्य सही तरीके से परिश्रम के साथ करेंगे किंतु परिणाम अच्छे नहीं आएंगे घर परिवार एवं परिजनों का सहयोग नहीं मिलेगा उनसे दूर भी होना पड़ सकता है विश्वास पात्र व्यक्ति से धोखा मिल सकता है सदाचार में कमी आ सकती है कष्ट कर यात्राएं करनी पड़ सकती हैं खर्च बहुत बढ़ जाएगा जिससे आर्थिक संतुलन बिगड़ेगा 3 जून से बृहस्पति बदलकर आपकी राशि में आएगा मानसिक एवं शारीरिक कष्ट बना देगा रुकावटें आएंगी झगड़ा झंझट विवाद से बचते रहना है धर्म का पालन करना पूजा पाठ में मन भी नहीं लगेगा राहु केतु कुछ ना कुछ काम बनाते रहेंगे जिससे पैसा आता रहेगा नवंबर दिसंबर एवं जनवरी का मध्य आपके लिए अच्छा रहेगा रुके कार्य पूरे होंगे स्वास्थ्य में सुधार होगा मान सम्मान बढ़ेगा गुरु की शांति के लिए चने की दाल हल्दी गुड गाय को खिलाने दान करें बृहस्पति का जाप करें परेशानियों में कमी आएगी

सिंह- वर्ष के आरंभ में एकादश लाभ भाव में आया गुरु का फल आपके लिए अनुकूल है पुत्रादिकों की उन्नति नए पद अथवा अधिकार की प्राप्ति मान सम्मान की वृद्धि वहुविधि लाभ के अवसर आएंगे स्वास्थ्य अच्छा रहेगा कोई अस्थाई लाभ होगा शत्रु पराजित होंगे मांगलिक कार्य संपन्न होंगे नौकरी में पदोन्नति एवं व्यापार में अच्छा लाभ होगा न्यायालय से संबंधित कार्यों में सफलता मिलेगी सबके बावजूद शनि की ढैया कुछ ना कुछ अपना रंग दिखाती रहेगी स्त्री पुत्रादिकों से मनमुटाव पैदा हो सकता है जीवनसाथी का स्वास्थ्य भी प्रभावित रहेगा संतान संपत्ति मित्र तथा घरेलू सुविधा संसाधनों के लिए शनि अच्छा नहीं शनि की शांति करते रहें राहु एवं केतु अपव्यय कराएंगे 3 जून से बृहस्पति बदलकर के हल्का पड़ जाएगा पैसा खूब खर्च कराएगा स्वास्थ्य खराब रहने लगेगा समाज में आपके प्रति अच्छी धारण नहीं रहेगी कई तरह की परेशानियां घेर लेंगी शनि गुरु राहु केतु की शांति से कुछ आवश्यक लाभ होगा

कन्या- कन्या राशि वालों के लिए यह वर्ष मध्यम फल कारक है पद प्रतिष्ठा में कमी आएगी स्वयं का स्वास्थ्य भी अच्छा नहीं रहेगा जिससे मन परेशान रहेगा पैसों की कमी का अनुभव होगा खर्च की अधिकता रहेगी जमीन जायदाद से संबंधित कार्यों में व्यवधान आ सकता है स्त्री संतान का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है जिससे मानसिक व्यथा रहेगी 3 जून से बृहस्पति एकादश में आकर के आपके पद प्रतिष्ठा में वृद्धि करेगा आप मानसिक रूप से सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव करेंगे आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा धन संपत्ति के क्षेत्र में अच्छा रहेगा शनि के प्रभाव के कारण घर परिवार से दूर रहना पड़ सकता है तथा कष्ट कर और अनचाही यात्राएं आपको करनी पड़ सकती हैं राहु केतु के कारण स्वास्थ्य परेशान रहेगा और चुनौतियां लेकर के आएगा किंतु अचानक किसी ने किसी माध्यम से धन का आगमन होता रहेगा आरंभ में गुरु की शांति शनि तथा राहुकेत की वर्ष पर्यंत शांति से लाभ होगा

तुला- बर्षारम्भ में नवम भाग्य भाव का बृहस्पति अनुकूल है तथा शुभ फल प्रदान कर रहा है आपके कार्य क्षमता का विस्तार हो रहा है तथा आप द्वारा उल्लेखनिय प्रशंसनीय कार्य किए जाएंगे पुत्रादिकों की उन्नति होगी नए अधिकार पद प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी प्रत्येक कार्यों में सफलता मिलती रहेगी यह समय भाग्योन्नति का है शनि सर्वथा अनुकूल फल दे रहा है शत्रु विरोधी शांत हो जाएंगे अथवा आपसे सुलह समझौता कर लेंगे स्त्री परिवार का उत्तम सुख सानिध्य प्राप्त रहेगा जमीन जायदाद संबंधी कोई स्थिर लाभ हो सकता है 3 जून से बृहस्पति परिवर्तित होकर के हल्का पड़ जाएगा पद प्रतिष्ठा मान सम्मान में कमी का अनुभव होने लगेगा पैसों की कमी हो जाएगी तथा मन उदास रहेगी फिर भी नवंबर दिसंबर और जनवरी का समय आपके लिए भाग्योदय कारक है राहु केतु पैसा भी दिलाएंगे किंतु खर्च भी करेंगे कुल मिलाकर के आपके लिए यह वर्ष अच्छा एवं शुभ फल कारक है परिश्रम करने से सफलता मिलती रहेगी

 

वृश्चिक- वर्षारम्भ में अष्टम भाव से गुरु का गोचर बहुविधि कष्ट कारक है रोग शोक बंधन की स्थिति स्वयं का स्वास्थ्य प्रभावित रहा करेगा जिससे शारीरिक एवं मानसिक दोनों प्रकार के कष्ट आते रहेंगे कष्ट कर यात्राएं करनी पड़ सकती हैं पंचम का शनि भी कष्ट कारक है खर्च बढ़ जाने से आर्थिक संतुलन बिगड़ता रहेगा परिजनों को भी कष्ट होगा लड़ाई झगड़ा से सर्वथा दूर रहे 3 जून से गुरु का राशि परिवर्तन आपकी प्रायः सभी परेशानियों को खत्म कर देगा स्वास्थ्य सुधरने लगेगा धन का आगमन होने लगेगा मान सम्मान पद प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी पुत्रों की उन्नति होगी तथा अधीनस्थ प्रायः सभी कार्यों में सफलता का मार्ग निकलने लगेगा राहु केतु कुछ परेशान करेंगे शारीरिक और मानसिक कष्ट देंगे किंतु 3 दिसंबर से राहु केतु का राशि परिवर्तन आपके लिए शुभ फल कारक होगा बर्षारंभ में गुरु की शांति तथा राहु केतु का उपाय भी आपके लिए हितकर होगा शनि का भी उपाय करें रास्ता निकलता रहेगा

धनु- वर्षारम्भ से सप्तम भाव का बृहस्पति बहुविधि सुखकारक है स्वास्थ्य अच्छा रहेगा भौतिक सुख सुविधाओं के नए-नए साधन जुटेंगे स्त्री परिवार का उत्तम सुख प्राप्त होगा नया घर मकान भूमि इत्यादि के कार्यों में सफलता मिलेगी घर परिवार में मांगलिक कार्य करने का अवसर आएंगे अच्छा भोजन अच्छा स्वास्थ्य रहेगा 3 जून से बृहस्पति बदलकर अष्टम भाव का हो जाएगा

परेशानियां घेर कर आएंगी रोग-शोक एवं बंधन की स्थिति कष्ट कर यात्राएं करनी पड़ेगी वाणी व्यवहार में कटुता एवं कठोरता आ जाएगी जिसके कारण घर परिवार एवं समाज में आपकी स्थिति थोड़ी बिगड़ जाएगी नौकरी में विपरीत स्थानांतरण अथवा अधिकारियों से अनबन जिससे मानसिक प्लेस होगा

व्यवसाय धंधा मंदा पड़ जाएगा पैसे की कमी का अनुभव होगा शनि की ढैया से भी गुजर रहे हैं कुछ ना कुछ कष्ट शनि के कारण भी होगा राहु के अप्रत्याशित रूप से कुछ ना कुछ काम बनते रहेंगे पैसा दिलाते रहेंगे गुरु शनि की शांति करते रहने से लाभ होगा

राजस्थान में बदलेगा मौसम का मिजाज, अगले 3 दिन इन जिलों में बारिश-आंधी की संभावना – IMD

मकर- वर्षारम्भ से छठे भाव का गुरु मध्य फल कारक है सुंदर से सुंदर व्यक्ति सुंदर से सुंदर अच्छी चीज आपको आकर्षित नहीं कर सकती उदासी एवं दीनता का भाव छाया रहेगा घर बाहर कहीं भी मन नहीं लगेगा तरह-तरह के रोग ब्याधि शरीर को कष्ट पहुंचाते रहेंगे स्त्री पुत्रादिकों से वैचारिक मतभेद रहेगा पेट संबंधित कोई परेशानी हो सकती है

जिससे शरीर कमजोर होगा धन की कमी का अनुभव होगा राजकीय एवं न्यायालय संबंधी कार्यों में विपरीत परिणाम मिलेंगे राहु केतु भी अच्छा फल नहीं दे रहे हैं जून से बृहस्पति परिवर्तित होकर आपके लिए शुभ फलकारक हो जाएगा शनि वर्षारम्भ में ही आपके समस्त परेशानियों को समाप्त कर देंगे प्राय प्रत्येक कार्यों में सफलता मिलने लगेगी नौकरी में पदोन्नति एवं व्यवसाय में उन्नत होगी घर परिवार में विवाह पुत्र जन्मादिक मांगलिक कार्य संपन्न होंगे स्त्री परिवार का सुख सानिध्य प्राप्त होगा नया घर नई गाड़ी एवं भौतिक सुख सुविधाओं के अनेक साधन एकत्रित हो जाएंगे अच्छे समय का सदुपयोग करें

कुंभ- वर्षारम्भ से पंचम भाव का गुरु शुभ फल कारक है आपकी बुद्धिमता का विकास होगा वाणी व्यवहार में निखार आएगा आपके द्वारा उल्लेखनीय कार्य किए जाएंगे घर परिवार समाज में प्रशंसा के पात्र होंगे

पुत्रादिकों की उन्नति होगी एवं घर परिवार में विवाह एवं पुत्र जन्मादिक मांगलिक कार्य के अवसर आएंगे स्त्री परिवार का उत्तम सुख सानिध्य प्राप्त होगा भौतिक सुख सुविधाओं के नए-नए साधन जुटेंगे भूमि वाहन भवन से संबंधित कोई स्थिर लाभ होगा अधीनस्थ सहायक सभी आपकी सेवा में तत्पर रहेंगे स्वास्थ्य अच्छा रहेगा नौकरी मे पदोन्नति होगी व्यवसाय में वृद्धि होगी

सबके बावजूद आप शनि की उतरती साडेसाती के चपेट में है अतः कुछ ना कुछ परेशानी लगी रहेगी 3 जून से बृहस्पति भी बदलकर हल्का पड़ जाएगा अनेक की समस्याएं खड़ी हो जाएगी स्वास्थ्य ढीला पड़ जाएगा पेट से संबंधित रोग परेशान करेगा झगड़ा विवाद से दूर रहे आपके लिए लाभकारी होगा राहु केतु कहीं ना कहीं से पैसा दिलाते रहेंगे नवंबर दिसंबर जनवरी आपके लिए काम बनाने वाले होंगे गुरु और शनि की शांति करते रहिए लाभ मिलेगा ।

मीन- मीन राशि वालों के लिए यह वर्ष अच्छा नहीं है आपकी राशि में ही शनि संरक्षण कर रहा है अतः आप शनि की मध्य साडेसाती के चपेट में हैं तरह-तरह की शारीरिक मानसिक सामाजिक आर्थिक परेशानियां आ सकती हैं

जिससे कष्ट होगा चतुर्थ भाव मे आया बृहस्पति भी सहायता नहीं कर पा रहा है मन अशांत रहेगा नए शत्रु एवं विरोधी पैदा हो जाएंगे घर परिवार से दूर कष्ट कर यात्राएं करनी पड़ेगी राजकीय एवं न्यायालय से संबंधित कार्यों में व्यवधान आ जाएंगे उदास मन थका हुआ रहेगा

राहु के कारण कुछ ना कुछ पैसा आता रहेगा और काम बनता रहेगा 3 जून से बृहस्पति बदल जाएगा और आपकी सभी परेशानियां काई की तरह छट जाएंगी स्वास्थ्य सुधारने लगेगा

असंतुष्ट परिजन एवं विमुख हुए मित्र आपसे मेलजोल बढ़ा लेंगे रुके हुए अधूरे काम प्रगति में आएंगे वाणी बुद्धि का विकास होगा एवं आपके द्वारा उल्लेखनीय कार्य किए जाएंगे

भौतिक सुख सुविधा के साधन जुटेंगे नौकरी में पदोन्नति एवं व्यवसाय में उन्नत होगी प्रत्येक शनिवार को शनि भगवान के निकट तिल का तेल दीपक जलाएं सुंदरकांड पाठ हनुमान जी की आराधना से लाभ मिलेगा

चंद्र राशि या नाम राशि के आय-व्यय के अंक

आय – मेष १४ , वृष ०८, मिथुन १४, कर्क ०८, सिंह ११, कन्या १४, तुला ०८, वृश्चिक १४, धनु ११ , मकर ०५ , कुंभ ०५, मीन ११

व्यय – मेष ०२, वृष ११, मिथुन ०८, कर्क ०५, सिंह ०२, कन्या ०८तुला ११, वृश्चिक ०२, धनु ०८ मकर ११, कुंभ ११, मीन ०८

आय-व्यय देखने की विधि : अपनी चंद्र राशि या नाम राशि के सामने लिखे आय-व्यय के अंकों को जोड़िए। जोड़ने के बाद उसमें 1 घटाइए और उसके बाद योग में 7 का भाग दीजिए। भाग देने के बाद जो बाकी बचेगा उसका फल इस प्रकार से है।

– अगर 1 (लाभ)बचे तो उस साल आपकी आमदनी अच्छी और खर्च कम होता है।

– अगर 2 बचे तो (सौख्य)उस साल आमदनी और खर्च बराबर-बराबर रहता है।

– अगर 3 बचे तो (क्लेश) उस साल आमदनी कम होती है और खर्च ज्यादा होते हैं।

– अगर 4 बचे तो (रोग) आमदनी के नए स्रोत बनते हैं और खर्च भी जरूरत के मुताबिक होता रहता है। आर्थिक स्थिति संतोषजनक रहती है।

हिंदू नववर्ष संवत् 2083 – पंचांग, ज्योतिष एवं भविष्यफल

– अगर 5 बचे तो (लोकापवाद) आमदनी बहुत कम होगी और खर्च भी उसी के अनुसार सिकुड़ जाते हैं।

– अगर 6 बचे तो (सम्मान) आमदनी नहीं के बराबर होती है या बड़ी मुश्किल से धन मिलता है और सामान्य खर्च में कटौती करनी पड़ती है।

– अगर 7 बचे तो (विजय)आमदनी अच्छी होती है लेकिन खर्च पर भी नियंत्रण नहीं रहता है।

– अगर 8 या 0 बचे तो उस साल आमदनी कम होती है और खर्च ज्यादा होते हैं।

उदाहरण : नीरज कुमार की वृश्चिक राशि है. जिसमें आय 14 और व्यय 02 है। दोनों का योग 16 होता है। इसमें से 1 घटाने पर 15 आया 8 का भाग देने पर 7 बचता है। इस 7 अंक का फल उपरोक्त विश्लेषण में यही दिया है कि आमदनी बहुत अच्छी होती है और खर्च कम

बाकी राशियों का भी इसी तरह से आमदनी और खर्च निकाला जा सकता है।

आनंद काले बहु राज लक्ष्मी:।

शिव प्रसादात्त धन धान्य वृद्धि:।।

वाधा हता शत्रु विनाश नेनम् ।

ददाति दानं विपुलम् धनायु:।।

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्।।

ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते |

पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवा व शिष्यते ||

ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्ष गुं शान्ति:,पृथ्वी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शांन्ति: वनस्पतय: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति: सर्व गुं शान्ति:, शान्तिरेव शान्ति:, सा मा शान्तिरेधि॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:॥

।।शुभम् भूयात् मंगलमय कल्याणमस्तुः

हिंदू नववर्ष संवत् 2083 – पंचांग, ज्योतिष एवं भविष्यफल

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