भगवान अपने भक्त की रक्षा स्वयं करते हैं: दंडी स्वामी शिवेंद्राश्रम महाराज
कालू (श्रेयांस बैद):श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर व्यास पीठ पर कथा का रसपान करवा रहे दंडी स्वामी शिवेंद्राश्रम महाराज ने उपस्थित जन समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि
जड़भरत विरक्ति सिखाते हैं, अजामिल नाम-महिमा बताते हैं, और प्रह्लाद निष्ठा एवं समर्पण का आदर्श प्रस्तुत करते हैं।

इन कथाओं का श्रवण-पठन जीवन को भक्ति-मय बना देता है।

भगवान का नाम इतना शक्तिशाली है कि अनजाने में भी जपने से मुक्ति मिल सकती है अंतिम समय में सच्ची पुकार होनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि मोह कितना सूक्ष्म होता है और सच्ची भक्ति से जीव कितनी योनियों से मुक्त होकर परमात्मा प्राप्त करता है ।
श्रीमद् भागवत कथा के ये प्रसंग हमें शिक्षा प्रदान करते हैं जिन्हें भगवन्नाम के साथ अंगीकार करना चाहिए।
आयोजन समिति के देवीलाल पारीक ने बताया कि कथा सुनने को लेकर उत्साह है आवागमन के लिए बसों की व्यवस्था भी की गई है।

भगवान अपने भक्त की रक्षा स्वयं करते हैं: दंडी स्वामी शिवेंद्राश्रम महाराज




