भारत में पारंपरिक खेलों का भी अपना महत्व है। कबड्डी, खो-खो, कुश्ती और गिल्ली-डंडा जैसे खेल आज भी ग्रामीण इलाकों में लोकप्रिय हैं।
हालाँकि, इन खेलों को पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिलता। यदि स्थानीय खेलों को बढ़ावा दिया जाए तो वे भी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँच सकते हैं।

हाल ही में कई राज्य सरकारों ने स्थानीय खेलों को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएँ बनाई हैं। युवाओं में उत्साह और भागीदारी देखकर यह साफ है कि भारत का खेल भविष्य बहुत उज्ज्वल है।
स्थानीय खेल हमें हमारी संस्कृति और जड़ों से जोड़े रखते हैं।


